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जलियांवाला बाग का दर्द

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चंडीगढ़। शहीद उधम सिंह के बलिदान दिवस की पूर्व संध्या पर बाल भवन के नवरंग थियेटर में हरियाणा कला परिषद और उधम सिंह इमरजेंसी ब्लड डोनेशन वेलफेयर एसोसिएशन ने मंगलवार को ‘जलियांवाला बाग’ नाटक का मंचन किया। संवाद थिएटर ग्रुप के सहयोग से आयोजित इस नाटक का प्रोडक्शन उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पटियाला ने किया। नाटक में दिखाया गया कि किस प्रकार से 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर शहर के जलियांवाला बाग में एक दर्दनाक निर्दयतापूर्ण घटना घटी थी, जिसे भारतीय कभी नहीं भूल सकेंगे। इस दिन जनरल डायर ने सैकड़ों निहत्थे भारतीय पर गोलियां बरसा दी थीं। उसी घटना को याद करते हुए 2019 में देशभर में उस हत्याकांड में शहीद हुए लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए जलियांवाला बाग घटना के नाम पर शताब्दी वर्ष मनाया जा रहा है। इस घटना के जिम्मेदार लोगों को उधम सिंह ने किस प्रकार मौत के घाट उतारा, उनकी देशभक्ति का जज्बा इस नाटक में दिखाया गया। इस नाटक को अनूप शर्मा ने लिखा और निर्देशन मुकेश शर्मा ने किया। नाटक की कहानी शुरू होती है एक फौजी के साथ। यह फौजी जलियांवाला बाग में 13 अप्रैल को शहीदों को श्रद्धांजलि देने आया है। वहीं पर एक नव युवकों का समूह आता है। जो पवित्र स्थल पर मस्ती के मूड में आए हैं। इससे फौजी नाराज होता है और उन्हें बताता है कि यह धरती मस्ती या सेल्फी लेने की नहीं है बल्कि देश प्रेम की भावना जागृत करने की है। तब फौजी उन्हें वह बताता है कि किस प्रकार जनरल डायर ने यहां पर उस काली घटना को अंजाम दिया था और किस प्रकार उधम सिंह ने 21 साल तक अपने लक्ष्य का पीछा किया। अंत में दोषी को मारकर स्वयं हंसते हंसते फांसी पर लटक गए।
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