चंडीगढ़। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे जगतार सिंह हवारा को जिला अदालत ने 18 साल पहले दर्ज एक केस में बरी कर दिया। पुलिस ने साल 2005 में हवारा के खिलाफ देश के खिलाफ षडयंत्र रचने, सेना बनाने व हथियार इकट्ठा करने के आराेप में मामला दर्ज किया था, जिसमें उसे बरी से बरी कर दिया है।
सेक्टर-36 थाना पुलिस ने 16 जुलाई 2005 को आईपीसी की धारा 121, 121ए, 123, 153, 120बी, आर्म्स एक्ट व एक्स्पलोसिव एक्ट की धाराओं के तहत केस दर्ज किया था, लेकिन पुलिस हवारा पर लगे आरोपों को अदालत में साबित नहीं कर पाई। मामले में हवारा के वकील अमर सिंह चहल ने बताया कि मामले में गवाह ने जगतार सिंह हवारा को पहचानने से इन्कार कर दिया। चहल की ओर से दलील दी गई कि इस मामले में मुख्य आरोपियों को सजा हो चुकी है जबकि हवारा का इस वारदात से कोई ताल्लुक नहीं था। वहीं, पुलिस का आरोप था कि हवारा व उसके साथी खालिस्तान बनाने और देश में आतंक फैलाने का काम कर रहे थे। पुलिस को इनसे एक पिस्टल, 5 कारतूस और 450 ग्राम आरडीएक्स बरामद हुआ था। बता दें कि इस मामले में हवारा के अलावा परमजीत सिंह उर्फ सुखा और कमलजीत सिंह उर्फ मान भी आरोपी थे। इन्हें अदालत ने दोषी करार देते हुए 7 साल कैद की सजा सुना दी थी जबकि हवारा के खिलाफ कई साल तक केस का ट्रायल ही नहीं चल सका था।