मालवा के दिग्गज कांग्रेसी नेता जगमीत बराड़ ने एक बार फिर प्रदेश कांग्रेस प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ एलान-ए-जंग किया है। इस बार भी बराड़ ने चुपचाप ट्विटर को जरिया बना कर कैप्टन के खिलाफ तीखा हमला बोला है।
दिलचस्प बात यह है कि बराड़ ने हाईकमान की चेतावनी को भी नजरअंदाज कर दिया। कैप्टन कैंप की ओर से वीरवार को खडूर साहिब उप चुनाव के बायकॉट पर सभी सिटिंग विधायकों द्वारा समर्थन के लिए प्रेस बयान जारी किया गया था। साथ ही 20 पूर्व विधायकों द्वारा बराड़ को पार्टी से निकालने की मांग की गई थी।
बराड़ ने शुक्रवार को ट्वीट कर कैप्टन के लिए लिखा है कि खडूर साहिब उपचुनाव के मुद्दे पर वह सीएम प्रकाश सिंह बादल, डिप्टी सीएम सुखबीर बादल और अकाली विधायकों के भी दस्तखत करवा लें ताकि कोरम पूरा हो जाए। एक अन्य ट्वीट में बराड़ ने लिखा है कि 2003 में 70 नेता उनके खिलाफ थे, लेकिन तत्कालीन महासचिव प्रणव मुखर्जी ने कहा था कि सस्पेंशन नहीं होगा।
एक और ट्वीट में बराड़ ने लिखा है कि उन्होंने अभी उनका इस्तीफा मांगने वाले पहले पांच पूर्व विधायकों के नाम देखे। ये सभी सुखबीर बादल के साथ थे और हमेशा चुनाव में कांग्रेस की मुखालफत की। ये सभी हाईकमान को गुमराह कर रहे हैं। एक अन्य ट्वीट में बराड़ ने सफाई दी है कि उन्होंने न तो हाईकमान के खिलाफ कुछ बोला न ही जाट महासभा का गठन किया। वह पीपीसीसी प्रधान को नहीं मानते, लेकिन सच तो कड़वा होता है।
बराड़ ने यह भी लिखा है कि उन्हें हैरानी है कि अमरिंदर ने अपने स्तर पर बायकॉट का फैसला लेने से पहले अंबिका, भट्ठल, लाल सिंह, जाखड़, चन्नी, बाजवा से कोई सलाह ली होगी। उधर, पार्टी जगमीत बराड़ के इस रवैये से मुश्किल में पड़ गई है।
पंजाब प्रभारी शकील अहमद ने बताया कि उन्होंने शुक्रवार को ही कैप्टन, जगमीत और कुछ विधायकों से इस मुद्दे पर बात की थी। सभी को कहा गया था कि सार्वजनिक बयानबाजी न करें। पार्टी की छवि को नुकसान न पहुंचाएं। शकील ने शुक्रवार को बातचीत के बाद भी बराड़ के ट्वीट पर हैरानी जताई। उन्होंने कहा कि वह किसी निजी समागम में हैं, लौटने के बाद इस मुद्दे पर बात करेंगे।