हरियाणा में गिरते लिंगानुपात को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार ने कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। सरकार ने 18 आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) सेंटर बंद करने के आदेश दिए हैं। ये सेंटर गुरुग्राम, झज्जर और पलवल में संचालित हो रहे हैं। इन सेंटरों के आईवीएफ रिकॉर्ड में लिंग असमानता काफी अधिक थी।
बैठक में लिए गए बड़े फैसले
इसको लेकर मंगलवार को एसटीएफ के अधिकारियों की बैठक भी हुई। इसमें तय किया गया कि आईवीएफ सेंटर एआरटी (सहायक प्रजनन तकनीक) और सरोगेसी के नोडल अधिकारियों की सूची सरकार के साथ साझा करेंगे। इसके अलावा, आईवीएफ के माध्यम से जन्मे बच्चों के परिणाम का विश्लेषण भी सरकार करेगी। आईवीएफ केंद्रों की ओर से दी जाने वाली रिपोर्ट को जन्म प्रमाण पत्र पंजीकरण से भी मिलाया जाएगा ताकि पता चल सके कि कितने बच्चों ने जन्म लिया और उनका लिंग क्या था और कितनों का गर्भपात हुआ। हरियाणा के सभी केंद्रों को इसकी रिपोर्ट अगले हफ्ते तक देने के भी निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने फिलहाल नए पंजीकरण पर रोक लगा दी है।
हर जिले में पुलिस सेल होगा गठित
एसटीएफ ने प्रत्येक जिले में डीएसपी रैंक के अधिकारी की अध्यक्षता में एक पुलिस सेल गठन करने के निर्देश दिए हैं। यह सेल सिविल सर्जन के समन्वय बनाकर पीसी पीएनडीटी और एमटीपी अधिनियम को कड़ाई से लागू करने की दिशा में काम करेगा। वहीं, एसटीएफ में अभियोजन विभाग को भी शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
गांवों में लिंगानुपात का डाटा खंगाला जाएगा
सभी गांवों के पांच सालों का लिंगानुपात का डाटा एकत्र करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके साथ ही कम लिंगानुपात वाले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। इसके साथ पिछले दिनों जिन 12 सामदुायिक केंद्रों के एसएमओ को नोटिस दिया गया था, उन्हें व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाने के निर्देश दिए हैं। यदि उनके जवाब से अधिकारी संतुष्ट नहीं दिखे तो इन एसएमओ को चार्जशीट किया जा सकता है। इसके साथ ही बीएमएस डॉक्टरों के लिए भी एक एसओपी तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
एमटीपी किटों की बिक्री का विवरण रखा जाएगा
प्रत्येक जिले में बिकने वाली एमटीपी किट (गर्भपात करने वाली किट) की बिक्री का बैचवार डाटा रखा जाएगा। इसके साथ ही 23 एमटीपी केंद्रों को नोटिस जारी किया गया है। अंबाला के एक एमटीपी सेंटर का लाइसेंस भी निलंबित कर दिया गया है।