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पीयू कैलेंडर को बदलना आसान नहीं.. इसके बिना भी हो सकता है शासन सुधार

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चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय शासन सुधार के लिए बनाई गई उच्च स्तरीय समिति को पीयू के पूर्व वीसी प्रो. एके ग्रोवर ने सुझाव भेजे हैं। भेजे गए सुझावों की पीयू के शिक्षक भी प्रशंसा कर रहे हैं।
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सुझाव के जरिए कहा है कि पीयू के कैलेंडर को समय के मुताबिक बदलना चाहिए। यह तभी हो सकता है, जब पंजाब व केंद्र की सरकारें राजी होंगी। इसे लेकर पूर्व के अनुभव बेहतर नहीं रहे हैं। ऐसे में कैलेंडर बदलाव की संभावनाएं कम हैं। बिना कैलेंडर बदले भी शासन सुधार संभव है, जो कमेटी करेगी। सुझावों के जरिए उन्होंने जोर दिया है कि एक सीनेटर को एक ही संकाय चुनने का मौका मिले। साथ ही सिंडिकेट के सदस्य को बार-बार नहीं चुना जाना चाहिए। एक बार चुने जाने के बाद दूसरे व्यक्ति को मौका मिलना चाहिए।
आजादी के समय ही हो जाना था एक्ट में संशोधन
पूर्व वीसी प्रो. एके ग्रोवर का कहना है कि पीयू की बेहतरी के लिए सीनेट का होना जरूरी है। इसमें राजनीति का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। इस बदलाव की बात 1933 में ही हो गई थी, लेकिन 87 साल बाद भी यह नहीं हुआ। जबकि दूसरे विश्वविद्यालयों ने आजादी के बाद अपने एक्ट में बदलाव किए और आज वह विश्वविद्यालय दौड़ रहे हैं। 1933 में पीयू की ओर से एक जांच कमेटी बनाई गई थी, उस कमेटी के सचिव जेएफ ब्रूश थे जो हिस्ट्री विभाग के प्रोफेसर थे। उन्होंने ‘हिस्ट्री ऑफ यूनिवर्सिटी ऑफ पंजाब’ नामक बुक लिखी और उसके आखिरी के चार पन्नों में पीयू के एक्ट में बदलाव की बात कही। यह बदलाव उस दौरान नहीं हुआ। न ही आजादी के समय हुआ और न 1966 में, जब री-ऑर्गेनाइजेशन ऑफ पंजाब हुआ। एक्ट में जो भी अब बदलाव होगा, उसमें पंजाब व केंद्र सरकार की अनुमति जरूरी है। हालांकि अब बनाई गई कमेटी इस पर काम कर सकती है, लेकिन आसान नहीं है कि दोनों सरकारें मान जाएं।
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ये हैं सुझाव
सिंडिकेट चुनाव में एक सीनेटर को केवल एक ही संकाय में मतदान करना चाहिए।
सिंडिकेट का सदस्य एक बार बनने के बाद दोबारा मौका न दिया जाए।
संकाय सदस्यों की ओर से सीनेट सदस्यों का चुनाव किया जाना चाहिए।
सीनेट चुनाव की प्रक्रिया नए सिरे से शुरू की जानी चाहिए।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के लिए मतदाता सूची को दुरुस्त किया जाए। बूथ चंडीगढ़ व पंजाब के कॉलेजों में ही बनाए जाएं।
समिति को कई लोगों ने सीधे भेजे ये सुझाव
सीनेट के एक कार्यकाल में जो व्यक्ति सदस्य रहता है, उसे दोबारा न चुना जाए। न ही उसे नामित किया जाना चाहिए।
संकाय चुनाव की सीटों की संख्या बढ़े और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सीटें कम की जाएं।
सीनेट की कुल 91 सीटों को कम किया जाना चाहिए।
सिंडिकेट व सीनेट के सदस्यों के नाम अलग-अलग हों। सीनेट में चुने गए लोग सिंडिकेट में न आएं।
डीन के लिए चुनाव न हो। साक्षात्कार या योग्यता के आधार पर प्रोफेसरों को लगाया जाए।
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पीयू शासन सुधार की मांग लंबे समय से चली आ रही है। यह बहुत पहले हो जाना चाहिए था, लेकिन नहीं हो सका। पीयू कैलेंडर में बदलाव की आवश्यकता है। यदि यह नहीं हो पाता है तो भी शासन सुधार किया जा सकता है। इसके लिए हमने समिति को सुझाव दिए हैं। -प्रो. एके ग्रोवर, पूर्व वीसी पीयू
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संस्थान, शिक्षक व विद्यार्थियों की बेहतरी के लिए समय-समय पर सुधार होने चाहिएं। पीयू के अकादमिक ढांचे में भी बदलाव की जरूरत है। विद्यार्थियों को अधिक लाभ मिलें, वे चीजें होनी चाहिएं। राजनीति का वास नहीं होना चाहिए। जब बदलाव होता है तो संस्थान आगे बढ़ता है। -प्रो. आरसी सोबती, पूर्व वीसी पीयू
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