भारतीय जनता पार्टी के रविकांत शर्मा चंडीगढ़ के नए मेयर बन गए हैं। छात्र राजनीति से अपने राजनीतिक यात्रा शुरू करने वाले रविकांत शर्मा एक-एक सीढ़ी चढ़कर मेयर की कुर्सी तक पहुंचे हैं। मेयर बनने के बाद रविकांत शर्मा ने कहा कि मुझसे पहले भाजपा के चार मेयर ने जो काम शुरू कराए हैं, उन्हें पूरा करना मेरा पहला लक्ष्य है। रही बात वित्तीय संकट की तो सांसद किरन खेर और प्रदेश अध्यक्ष अरुण सूद की मदद से इस मामले को केंद्र सरकार के सामने रखकर वह समाधान निकालने की कोशिश करेंगे।
रविकांत शर्मा ने कहा कि 1995 में जब मैं चंडीगढ़ आया था तो मेरी प्राथमिकता संगठन के माध्यम से समाज में विकास कार्य कराना था। संगठन ने विश्वास जताया तो जिम्मेदारियां मिलती गईं। उन जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया तो संगठन ने मेयर पद के लिए उपयुक्त उम्मीदवार के रूप में चुना। अब मेयर की जिम्मेदारी भी पूरी ईमानदारी से निभाऊंगा।
वित्तीय समस्या के सवाल पर मेयर रविकांत शर्मा ने कहा कि निगम के प्रत्येक विकास कार्य के लिए एक निश्चित राशि होती है इसलिए वित्त की समस्या वहां आती है, जहां नए और बड़े प्रोजेक्ट को शुरू करना होता है। मेयर ने कहा कि भाजपा के शासनकाल में ही निगम 170 से 325 करोड़ तक राजस्व पैदा करने वाला विभाग बना है।
पार्षदों और अफसरों के बीच की कड़ी का काम करता है मेयर
निगम में अफसरों और पार्षदों के बीच हमेशा एक मनमुटाव रहता है। इस सवाल पर रविकांत शर्मा ने कहा कि अफसर ही शहर में हर कार्य को करते हैं। मेयर अथवा पार्षद उन्हें दिशा बताते हैं कि किस क्षेत्र में कौन सा कार्य को करना है। इसलिए मेयर अफसर और पार्षदों के बीच की कड़ी होता है। जब यह दोनों मिलकर बेहतर तरीके से काम करते हैं तो शहर में विकास के नए आयाम जुड़ते हैं।