पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अंबाला के टैक्सेशन इंस्पेक्टर द्वारा टैक्स की पर्ची काट कर इसे सरकारी खजाने में जमा न करवाने के मामले में जांच को आईजीपी भारती आरोड़ा की अध्यक्षता वाली एसआईटी को सौंपने के आदेश दिए हैं।
इस मामले में पूर्व की जांच को सीधे तौर पर सवालों के घेरे में लाते हुए हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि यह जांच चहेतों को बचाने के लिए की गई खानापूर्ति मात्र है। मामला अंबाला के टैक्सेशन विभाग से जुड़ा हुआ है।
आरोपों के अनुसार इंस्पेक्टर पंकज बठला ने वर्ष 1998 से 2015 के बीच 66 चालान बुक जारी करवाई थी। इन चालान बुक में से केवल 22 ही वापिस जमा करवाई गई। बाकी की चालान बुक का कोई हिसाब नहीं है।
आरोपों के अनुसार इससे राज्य सरकार को 38 लाख रुपए के राजस्व की चपत लगी है। मामले में आरोपी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए जमानत दिए जाने की अपील की थी।