चंडीगढ़। कोरोना के कारण हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी प्रभावित हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन्फ्लूएंजा इस कमी का ही परिणाम है। इस कारण सामान्य से ज्यादा दिनों तक मर्ज का असर रह रहा है। ऐसे में संक्रमित व्यक्ति को सलाह दी जा रही है कि वह खुद को कम से कम सात दिनों तक आइसोलेट रखें। अगर इसके बाद ठीक होने के अगले 24 घंटे तक कोई लक्षण न आए, तभी घर से बाहर निकले, क्योंकि इसमें भी कोरोना की ही तरह संक्रमण का विस्तार होता है।
पीजीआई के पूर्व डीन एकेडमिक व संस्थान में कोरोना के प्रबंधक रह चुके प्रो. जीडी पुरी ने बताया कि मौजूदा समय में फ्लू के साथ ही एलर्जी का भी प्रभाव है। पेड़-पौधों में परागकण काफी मात्रा में आ चुके हैं जिससे एलर्जी का बढ़ना एक सामान्य प्रक्रिया है। लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि संक्रमण या एलर्जी का प्रभाव छाती तक नहीं पहुंचना चाहिए क्योंकि कोविड के कारण सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव फेफड़ों पर ही पड़ा है। ऐसे में अगर पुनः संक्रमण हुआ तो मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है। प्रो. पुरी ने बताया कि इन्फ्लूएंजा किसी भी उम्र के व्यक्ति को कभी भी हो सकता है लेकिन इससे सबसे ज्यादा खतरा गर्भवती महिलाओं, पांच साल से कम उम्र के बच्चे, बुजुर्ग और गंभीर बीमारियों से ग्रस्त लोगों को इसका खतरा ज्यादा है।