इराक में आतंकियों की ओर से अगवा किए गए 40 भारतीयों के परिजनों के मन में उम्मीद की किरण जगाने वाला एक नया मोड़ आया है। अगवा हुए 40 भारतीयों के पिछले चार दिन से बंद पड़े मोबाइल फोन में से तीन के मोबाइल पर घंटी बजने लगी है। हालांकि दूसरी तरफ से फोन कोई उठा नहीं रहा लेकिन तीनों मोबाइल पर शुक्रवार रात लगातार घंटी बज रही थी और भेजे जा रहे एसएमएस भी डिलीवर हो रहे थे।
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होशियारपुर के गांव छावनी कलां के निवासी और अगवा हुए 40 पंजाबियों में शामिल कमलजीत के भाई परमिंदर ने बताया कि वह पिछले चार दिन से लगातार अपने भाई कमलजीत और जीजा कुलविंदर निवासी भोगपुर व गुरदीप निवासी जैतपुर के मोबाइल पर कॉल करता रहा है लेकिन उनके मोबाइल बंद ही चल रहे थे।
परमिंदर ने बताया कि अगवा हुए सभी भारतीय जिस कंपनी के कर्मचारी थे, वह भी दो साल तक उसी में काम कर चुके हैं। ऐसे में अगवा हुए लोगों में से अधिकतर उसके दोस्त व परिचित थे। उनमें से कुछ के मोबाइल नंबर उसके पास थे।
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लगातार घंटी जा रही है मगर कोई फोन नहीं उठा रहा
उसने बताया कि वह लगातार उन सभी नंबरों पर फोन करता आ रहा था। उसने बताया कि शुक्रवार रात करीब साढ़े आठ बजे जब उसने जीजा कुलविंदर के मोबाइल पर फोन किया तो घंटी बज उठी हालांकि किसी ने फोन नहीं उठाया। इस पर उसने कई बार कॉल की लेकिन फोन उठाया नहीं गया।
इसके बाद उसने एक-एक कर अपने पास मौजूद सभी नंबर ट्राई किए तो उसके पुराने साथी मन्नू निवासी फतेहगढ़ चूड़ियां का मोबाइल भी स्विच ऑन मिला। उस पर भी लगातार घंटी बजती रही लेकिन उसने भी फोन नहीं उठाया। इसके बाद उसने अपने भाई की ओर से कुछ दिनों पहले दिए गए एक अन्य नंबर पर फोन किया तो उस पर भी घंटी बज रही थी।
परमिंदर ने बताया कि अगवा हुए 40 युवकों में से तीन के मोबाइल शुक्रवार को चार दिन बाद स्विच ऑन हुए हैं। किसी ने फोन नहीं उठाया तो उसने एक एसएमएस भी डाला है कि अगर अपनी सलामती की खबर देने को कॉल नहीं कर सकते तो मैसेज या मिस कॉल ही कर दें। हालांकि देर रात खबर लिखे जाने तक पूरा परिवार जवाब का इंतजार कर रहा था।
खरड़ के एक परिवार के 6 लोग फंसे
इराक में फंसे पंजाब-हरियाणा के युवकों की सूचना मिलने के बाद खरड़ का एक परिवार इन दिनों डरा हुआ है। उनके परिवार के छह लोग इन दिनों इराक में हैं।
उनके परिजनों का कहना है कि उन्हें वापस नहीं आने दिया जा रहा और न ही उनके पासपोर्ट दिए जा रहे हैं। इस संबंध में जीटीबी नगर खरड़ निवासी हरबंस सिंह ने पंजाब सरकार द्वारा जारी हेल्पलाइन पर मदद की गुहार लगाई है।
हरबंस सिंह के अनुसार जब से इराक में हुई हिंसा के बारे में पता चला है उनकी पत्नी मंजीत कौर का रो-रोकर बुरा हाल है। सभी डरे हुए हैं।
वहीं मंजीत कौर ने बताया कि उसके दो भाई गांव सिद्धूपुर कलां, जिला फतेहगढ़ साहिब निवासी 30 वर्षीय सुरमुख सिंह व 28 वर्षीय जसबीर सिंह इराक के नरिया रोड पर स्थित शहर अजमजीर में रह रहे हैं।
वहीं पर फोर्ड डेमिनेशन नामक कंपनी में नौकरी करते हैं। सुरमुख विवाहित हैं और उनके दो बच्चे हैं, जबकि जसबीर अविवाहित हैं।
सुरक्षित हैं, लेकिन घर से निकलने का डर है
सुरमुख लगभग डेढ़ साल से इराक में हैं, जबकि जसबीर को तीन साल से अधिक समय हो गया है। जब से इराक में हिंसा फैली है तब से मंजीत कौर अपने भाइयों से बराबर संपर्क में है। हालांकि वह दोनों सुरक्षित हैं, लेकिन घर से निकलने से भी डर रहे हैं।
हिंसा के बाद से तो उन्होंने काम पर जाना भी बंद कर दिया था, लेकिन कंपनी द्वारा वाहन भेजकर जबरन उन्हें ले जाकर काम करवाया जा रहा है। उसके दोनों भाई वापस लौटना चाह रहे हैं, लेकिन कंपनी उनके पासपोर्ट उन्हें नहीं दे रही है।
फोन पर दोनों भाई बार-बार भारत सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं। उनका कहना है कि सुबह काम पर जाने के बाद उन्हें पता नहीं होता कि वह शाम को सुरक्षित लौटेंगे भी या नहीं।
मंजीत कौर ने बताया कि इसके अलावा उनके दो चचेरे भाई गांव सिद्धूपुर कलां निवासी मान सिंह और रोपड़ निवासी कुलदीप सिंह भी इराक की उक्त कंपनी में ही उसके भाइयों के साथ काम कर रहे हैं।
इसके अलावा हरबंस सिंह के साढ़ू गांव जसना, जिला रोपड़ निवासी बलजीत सिंह और उसके पिता जयराम और उसके रिश्तेदार गांव अमराली, रोपड़ निवासी सतनाम सिंह भी इराक की उसी कंपनी में काम कर रहे हैं।