इराक में बंधक बनाए गए 165 भारतीय वहां किस हालत में हैं, ये वहां से आए वीडियो में साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। ये वीडियो सीधे इराक से वहाट्सऐप पर अमर उजाला के संवाददाता के मोबाइल पर भेजे गए हैं। वीडियो में बंधक बनाए युवाओं ने अपनी मौजूदा हालत के बारे में खुलासा किया है।
गांव जटवाड, अंबाला (हरियाणा) निवासी इकबाल सिंह ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि अंबाला के ही एक एजेंट सीताराम के जरिए उन्हें यह नौकरी मिली थी। मोहाली के एक एजेंट ने उनके समेत यहां फंसे ज्यादातर लोगों की नौकरी अल जबूरी कंस्ट्रक्शन कंपनी में लगवाई थी। वेतन 6500 यूएस डॉलर था।
28 मार्च, 2013 को उन्होंने ज्वाइन किया और अप्रैल, 2014 को उन्हें आखिरी वेतन मिला था। यहां पंजाब के 53, हरियाणा के 49, राजस्थान के 25, यूपी के 22, बिहार के 2, तमिलनाडु के 8 और आंध्र प्रदेश के 6 लोग हैं। बसरा स्पोर्ट्स सिटी की एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम करने वाले इन भारतीयों को कंपनी केमालिक ने बंधक बना रखा है।
लंबे समय से न तो इन्हें वेतन मिला है, न ही भारत लौटने दिया जा रहा है। अब इन्हें खाना देना भी बंद कर दिया है। परेशान लोगों ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को पत्र लिखकर मदद की गुहार लगाई है।