अमेरिका द्वारा इराक में ड्रोन और हवाई हमले शुरू किए जाने से उन 40 भारतीयों के परिजनों की जान पर बन आई है, जिन्हें सरकार अभी तक इराक से नहीं निकलवा पाई है।
इराक में इस्लामी उग्रवादियों के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में हवाई हमले शुरू कर दिए गए हैं जिसका निशाना जाने-अनजाने वहां फंसे भारतीय भी बन सकते है। ऐसे में मोसुल में आईएसआईएस की ओर से बंधक बनाए गए भारतीयों के परिजनों में खौफ का माहौल है। इस बीच पिछले दिनों आई इन खबरों ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है कि इन 40 भारतीयों से आतंकवादियों द्वारा गोला बारूद उठवाने का काम कराया जा रहा है।
गौरतलब है कि इराक में मसूल की कंपनी से आईएसआईएस आतंकियों द्वारा भारतीयों को अगवा कर बंधक बनाया गया था। वहां अगवा हुए भारतीयों में शामिल होशियारपुर के गांव छावनी कलां के निवासी कमलजीत का भाई परमिंदर भी इसी कंपनी में दो वर्ष से ज्यादा नौकरी करके पिछले सितंबर में भारत लौटा था। परमिंदर लगातार वहां अपने परिचित इराकी लोगों से संपर्क बनाए हुए है।
परमिंदर का कहना है कि उसके भाई और उसके दो अन्य परिजन उन 40 भारतीयों में हैं, जिनको आतंकियों ने बंधक बना रखा है। इन 40 भारतीयों को आतंकियों द्वारा बंधक बनाए जाने के लगभग 2 माह बीत जाने के बाद भी भारत सरकार इनको छुड़वाने में कामयाब नहीं हो सकी है।
उसने केंद्र पर नाकामी का आरोप लगाते हुए कहा कि अमेरिका ने पहले तो वहां से अपने देश के लोगों को सही सलामत बाहर निकाल लिया, फिर वहां पर हमले शुरू कर दिए। लेकिन भारत सरकार को वहां पर फंसे हुए भारतीयों की कोई चिंता नहीं है। कमलजीत की माता का हाल बेहद खराब है क्योंकि न सिर्फ उनका बेटा बल्कि उनके भाई और ननद के दामाद भी आतंकियों के चंगुल में वहीं फंसे हैं जहां अमेरिका हवाई हमले कर रहा है।
उन्होंने केंद्र से अपील की है कि पहले वहां पर फंसे भारतीयों को निकालने तक अमेरिका पर हमलों को रोकने का दबाव बनाए और भारतीयों को वहां से सही सलामत निकालने के लिए प्रयासों को तेज करे।