चंडीगढ़। सेक्टर-19 स्थित पर्यावरण भवन में यूटी प्रशासक की सलाहकार परिषद की पर्यावरण स्थायी समिति की पहली बैठक हुई। इसकी अध्यक्षता हरियाणा विधानसभा के पूर्व स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता ने की। उन्होंने पर्यावरण के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे समिति को फील्ड विजिट कराएं, ताकि जमीनी हकीकत के बारे में पता चल सके।
बैठक में वायु और जल प्रदूषण, ठोस और बायोमेडिकल कचरे का सही निपटान, पानी की बचत और लोगों को जागरूक करने जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। साथ ही सीवेज ट्रीटमेंट, नालों (चो) की सफाई और सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की गई। इसमें वर्षा जल संचयन, रिचार्ज वेल और ऊर्जा बचत उपायों को बढ़ावा देने के सुझाव भी सामने आए।
अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता ने कहा कि शहर में प्रदूषण से जुड़ी कमियों को चिह्नित कर ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने स्कूलों, आरडब्ल्यूए, बाजार संघों और उद्योगों को इस मुहिम से जोड़ने पर जोर दिया। बैठक के अंत में अध्यक्ष ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी गंदा पानी बिना ट्रीटमेंट के नालों या जलस्रोतों में न जाए। इसके अलावा शहर में ई-वेस्ट के वैज्ञानिक ढंग से निपटान और सभी सदस्यों को फील्ड विजिट के जरिए हालात देखने की जरूरत पर भी जोर दिया गया।
ट्रैफिक सिग्नलों पर लाउडस्पीकर से दिए जाएंगे संदेश
गुप्ता ने सुझाव दिया कि ट्रैफिक सिग्नलों पर लगे लाउडस्पीकरों के जरिए पर्यावरण बचाव के संदेश दिए जाएं। समिति ने माना कि पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना जरूरी है, लेकिन साथ ही जो लोग पर्यावरण की रक्षा के लिए अच्छा काम कर रहे हैं, उन्हें सम्मानित किया जाना चाहिए।
बैठक में पूर्व मुख्य सचिव (हरियाणा) उर्वशी गुलाटी, लायंस क्लब चंडीगढ़ के अध्यक्ष जगदीश वालिया, रामाणी ग्रुप के एमडी हरिओम वर्मा, डॉ. रविंद्र नाथ और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्चर के चेयरमैन मनमोहन खन्ना समेत अन्य सदस्य शामिल रहे।