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Haryana: कृषि मंत्री कंवरपाल गुर्जर की प्राथमिकता-कल्याण के लिए बनाई योजनाओं को हर किसान तक पहुंचाएंगे

Mon, 01 Apr 2024 03:24 PM IST
निवेदिता वर्मा आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

पिछले कार्यकाल में उनके कुछ काम रह गए थे जिसको लेकर उन्हें मलाल भी है। उन्होंने शिक्षा मंत्री रहते हुए स्कूलों में 20 हजार शिक्षकों की भर्ती के लिए काफी प्रयास किए। इसमें वह कामयाब भी हुए, मगर उनके कार्यकाल में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो पाई। नए विभागों में अपने कार्यों, प्राथमिकताएं और कई अन्य विषयों पर उन्होंने विस्तार से बात की।
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विस्तार
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हरियाणा की नई सरकार में कृषि मंत्री कंवरपाल गुर्जर नंबर दो की हैसियत रखते हैं। विभाग संभालने के बाद उन्होंने अपना एजेंडा स्पष्ट कर दिया है। उनकी पहली प्राथमिकता है कि जो योजनाएं पहले से चल रही हैं उनको मजबूती से लागू किया जाए। नए विभागों में अपने कार्यों, प्राथमिकताएं और कई अन्य विषयों पर उन्होंने विस्तार से बात की।  

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नायब सैनी सरकार में आपको नए विभाग मिले हैं। समय कम है। ऐसे में कैसे जनता तक अपना काम पहुंचाएंगे?
मुझे जो भी जिम्मेदारी मिली है, उसका मैंने अच्छी तरह से निर्वाहन किया है। मनोहर लाल की सरकार में शिक्षा और पर्यावरण के अलावा अन्य विभाग भी मेरे पास थे। मैंने इन विभागों में काफी काम किया और मैं अपने काम से संतुष्ट हूं। अब सरकार ने मुझे कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन समेत अन्य विभाग दिए हैं। इन विभागों की जिम्मेदारी भी मैं अच्छी तरह से निभाने की पूरी कोशिश करुंगा। मैंने अधिकारियों के साथ बैठक कर ली है। जो योजनाएं चल रही हैं, उनका फीडबैक लिया है। जिन योजनाओं में किसानों को दिक्कत आ रही है, पहले उन्हें दुरस्त करने का काम किया जाएगा।

आचार संहिता हटने के बाद आपके पास 95 दिन होंगे। उसके लिए क्या कोई एजेंडा तैयार किया है?
हमारी पहली प्राथमिकता यही है कि किसानों के कल्याण के लिए जो योजनाएं चल रही हैं, उन्हें हर किसान तक पहुंचाने का काम किया जाए। इस समय फसल खरीद का सीजन चल रहा है। सरसों की खरीद बढ़िया हो रही है। अब गेहूं की खरीद शुरू होने वाली है। सीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि गेहूं की खरीद में किसी भी किसान को कोई परेशानी नहीं आनी चाहिए। हर किसान के खाते में उसका भुगतान 48 से 72 घंटे में हो जाए यह सुनिश्चित किया गया है।
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सरसों की खरीद में पहले ही दिन काफी दिक्कतें आई थीं। गेहूं खरीद में परेशानी न आए इसके लिए क्या कदम उठाए हैं?
पहले दिन एक-दो मंडियों में गेट पास बनने की दिक्कत आई थी। उसके बाद कोई दिक्कत नहीं आई। गेहूं की खरीद के लिए मंडियों में पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। उपायुक्तों को मंडियों के निरीक्षण के आदेश दिए गए हैं। एक अप्रैल से गेहूं की खरीद शुरू होगी। इसके लिए 417 केंद्र बनाए गए हैं।

विपक्ष का आरोप है कि हरियाणा में सिर्फ चार से पांच फसलें ही एमएसपी पर खरीदी जाती हैं?
हरियाणा ही एक ऐसा राज्य है, जहां सबसे ज्यादा फसलों को एमएसपी पर खरीदा जाता है। कुछ फसलों में भावांतर के तहत भरपाई की जाती है। भावांतर भी एमएसपी की तरह है। भावांतर से किसानों को फायदा पहुंचा है, नुकसान किसी को नहीं हुआ। सबसे बड़ी फसलें गेहूं, धान और गन्ना हैं। तीनों एमएसपी पर खरीदी जाती हैं। सरसों की खरीद भी एमएसपी पर की जा रही है। आप मंडियों में चेक कर सकते हैं। कई बार भाव एमएसपी से ज्यादा भी पहुंचता है। इससे तो किसानों को ही फायदा पहुंचता है। विपक्ष दस साल से सत्ता से दूर है। इसलिए बेवजह के मुद्दे उठाता है। पीछे किसान आंदोलन हुआ। इसमें हरियाणा के किसानों में कोई नाराजगी नहीं दिखी। उन्हें घर बैठे हर सुविधा मिल रही है।

फसल बीमा न कराने वाले किसानों को सरकार मुआवजा दे देती और बीमा कराने वालों को न सरकार से मुआवजा मिलता है और न बीमा कंपनी भुगतान करती है?
मैं आपकी बात से सहमत नहीं हूं। कुछ मामलों में अपवाद हो सकता है। फसल बीमा में तो किसानों को बहुत कम प्रीमियम देना पड़ता है। किसान भी बीमा करवाकर निश्चिंत हो जाता है। फसल बीमा के तहत किसानों को 30 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा मिलता है। यह तो किसानों के लिए फायदे का सौदा है। आपने जो सात जिले में फसल बीमा नहीं होने की बात बताई है, उसे मैं चेक करवाऊंगा। कोई न कोई तकनीकी खामियां जरूर रही होंगी। कई बार जो अच्छी योजनाएं होती हैं, विपक्ष उन्हें मुद्दा बनाकर हतोत्साहित करने का प्रयास करता है।

ओलावृष्टि से खराब हुई फसल का मुआवजा किसानों को कब तक मिलेगा?
क्षतिपूर्ति पोर्टल पर किसानों ने अपना ब्योरा दर्ज करवा दिया है। अब जांच चल रही है। आचार संहिता में मुआवजा जारी करने में कोई परेशानी नहीं आएगी।

पिछले कार्यकाल का कोई ऐसा काम, जो रह गया हो?
मेरे पास शिक्षा विभाग था। मैंने हर स्कूल में छह काम करवाने का वादा किया था। इनमें स्कूल की चाहरदीवारी, पीने का पानी, खेल का मैदान, वेंटिलेशन और रास्ता पक्का करना था। लगभग सभी स्कूलों में काम पूरा हो गया था, मगर कुछ स्कूलों में यह काम रह गया है। इसी तरह से 20 हजार शिक्षकों की भर्ती भी होनी थी। इन शिक्षकों की भर्ती की मंजूरी मिल चुकी है और भर्तियां हो रही हैं। मुझे पूरी उम्मीद है कि अगले सत्र में स्कूलों को 20 हजार शिक्षक मिल जाएंगे। यह काम मेरे कार्यकाल में हो जाते तो अधिक खुशी होती।

सरकार में आपकी हैसियत नंबर दो की है, मगर आपके विभाग अन्य मंत्रियों के मुकाबले हल्के हैं?
यह तो मुख्यमंत्री पर निर्भर करता है कि वह मुझे क्या जिम्मेदारी देना चाहते हैं और मैं कभी यह नहीं देखता कि मुझे कौन सी जिम्मेदारी मिली है। मेरा स्पष्ट एजेंडा है कि शीर्ष नेतृत्व जो भी मुझे काम देता है, मैं उसका निर्वहन उनकी उम्मीदों के मुताबिक कर सकूं और मैं उनके फैसले से संतुष्ट हूं। मैं पार्टी के साथ 1990 से जुड़ा हुआ हूं। संगठन में जिला अध्यक्ष से लेकर प्रदेश महामंत्री का पद संभाला, इसलिए छोटी-बड़ी जिम्मेदारी का मुझे फर्क नहीं पड़ता।
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आप मनोहर लाल के साथ काफी समय से जुड़े हैं उनकी किसी एक खूबी के बारे में बताइए जिससे आप काफी प्रभावित हुए?
मनोहर लाल पक्के इरादे वाले योजनाकार आदमी हैं। एक बार उन्होंने सोच लिया कि यह काम करना है तो भले ही उस काम को लेकर विरोध हो, लेकिन वह अपने इरादे से हटेंगे नहीं। उन्होंने मेरिट के आधार पर नौकरी देने का वादा किया था। कई लोग कह रहे थे कि यह हरियाणा में लागू नहीं हो सकता, लेकिन उन्होंने मेरिट के आधार पर ही नौकरियां दीं और मेरिट के आधार पर ही राज्य में विकास कार्य करवाए।

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