चंडीगढ़। इंटरनेट से दुनिया भले ही तेजी से जुड़ रही हो लेकिन ग्रामीण भारत में आज भी महिलाओं और पुरुषों के बीच इंटरनेट नॉलेज की एक बड़ी खाई है। गूगल के एक सर्वे के अनुसार, देश के ग्रामीण इलाकों में कुल इंटरनेट यूजर्स की संख्या में पुरुषों की भागीदारी 90 प्रतिशत है जबकि सिर्फ 10 फीसदी ग्रामीण महिलाएं ही इंटरनेट का इस्तेमाल करती हैं। 21वीं सदी के लिए यह आंकड़े हैरान करने वाले हैं। इसी खाई को पाटने के लिए गूगल ने ‘इंटरनेट साथी’ मुहिम के तहत पंजाब के 5 हजार गांवों को अगले 6 महीने में डिजिटली साक्षर बनाने का फैसला किया है।
दिसंबर 2015 में गूगल इंडिया ने टाटा ट्रस्ट के साथ मिलकर ‘इंटरनेट साथी’ नाम से एक डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम शुरू किया था। इसके तहत ग्रामीण महिलाओं को यह सिखाया जा रहा है कि कैसे इंटरनेट उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को फायदा पहुंचा सकता है। महिलाओं ने प्रशिक्षित होने के बाद अपने आसपास के क्षेत्र में अन्य ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षित किया। इस मुहिम को अब पंजाब में लांच किया गया है। फिलहाल, इंटरनेट साथी के तहत महिलाओं को डिजिटली साक्षर करने का काम पंजाब के 9 जिलों के 1250 गांवों में अभियान शुरू हो गया है। गूगल इंडिया के अनुसार, इंटरनेट साथी को आने वाले दिनों में करीब 5 हजार गांवों में फैलाया जाएगा। इंटरनेट साथी की शुरुआत मुख्य रूप से पंजाब के होशियारपुर और कपूरथला जिले में पारस रामपुर, कोतली थान सिंह, बुर्ज, वेहरा गांव से की गई है।
गूगल इंडिया के चीफ इंटरनेट साथी नेहा बड़जात्या ने कहा कि इंटरनेट साथी कार्यक्रम ने महिलाओं को रोजगार के अवसर दिखाए और बताया कि ऐसी कोई सीमा नहीं, जहां तक महिलाएं न पहुंच सकती हों। ग्रामीण भारत में महिलाओं को जोश कमाल का है, वो न केवल अपनी जरूरतों के लिए, बल्कि अपने परिवारों, बच्चों और समुदायों के लिए भी इंटरनेट सीख रही हैं। कुछ महिलाएं तो आगे बढ़कर अपना खुद का माइक्रो बिजनेस जैसे स्टिचिंग, हनी बी फार्मिंग और ब्यूटी पार्लर शुरू कर चुकी हैं। वहीं, अन्य महिलाएं अपने परिवारों और समुदायों को नया कौशल सिखाकर उनकी आजीविका बढ़ा रही हैं।