चंडीगढ़ की सबसे पुरानी महिला बांउसर की कहानी
लोगों के ताने की परवाह किए बगैर महिला बाउंसर रूपाली ने बेटे की अच्छी परवरिश दी। हाल ही कॅरिअर की तलाश में उनका बेटा दुबई गया है। रूपाली ने बताया कि उनका एक बेटा है। वह जॉब की तलाश में थी। एक जानकार उन्हें बिना बताए ड्यूटी पर ले गया। जब वहां पहुंची तो बाउंसर की ड्यूटी लगा दी। धीरे-धीरे और महिलाएं भी जुड़ती गईं। आज रूपाली को 15 से अधिक साल बाउंसर की ड्यूटी करते हो गया है। रूपाली ने बताया कि क्लब में शराब पीकर लड़कियां उलझ जाती हैं। कभी सुनना और सहना भी पड़ता है। लेकिन आज सुकून इस बात का है कि बच्चे को पढ़ा-लिखाकर इस काबिल बना दिया कि वह आराम से नौकरी कर रहा है।
टांग की हड्डी टूटने के बाद भी नहीं मानी हार, अब कर रही फूड डिलीवरी
औरत अगर ठान ले तो वह कुछ भी कर सकती है। यह कहना है मोहाली निवासी ज्योति का। उन्होंने बताया कि वह सिंगल मदर हैं। उनके पति के छोड़ जाने के बाद तीन बच्चों की जिम्मेदारियां उन पर आ गई। तब उन्होंने फैसला किया कि वह फूड डिलीवरी करेंगी। इस दौरान वे सड़क दुर्घटना में घायल हो गई। हादसे में उनकी टांग की हड्डी टूट गई, जिसके बाद 4 महीने तक वह बेड पर रही। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। वह दोबारा ठीक होकर काम पर गई।
उन्होंने कहा कि उनकी बड़ी बेटी 12वीं कक्षा, छोटी दसवीं और सबसे छोटा बच्चा भी पढ़ रहा है। उनके पास आय का कोई साधन नहीं था, इसलिए वह जॉब नहीं छोड़ सकती थी। जब वह फूड ऑर्डर लेकर जाती है तो टांग में रोड होने के कारण वह सीढि़यां नहीं चढ़ पाती। लोग भी उनसे आर्डर लेने नीचे नहीं आते, ऐसे में उन्हें कई तरीके की समस्याएं झेलनी पड़ती है, लेकिन उनका मानना है कि औरत अगर ठान ले तो वह कुछ भी कर सकती है। बस उसके हौसले बुलंद होने चाहिए।