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सोशल मीडिया पर कार्टून वार ने विस चुनाव को बनाया मसालेदार, देखिए

Mon, 23 Jan 2017 05:59 PM IST
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
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सोशल मीडिया
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पंजाब चुनाव प्रचार में इस बार कार्टूनों की दिलचस्प जंग देखने को मिल रही है। हर पार्टी कार्टून के माध्यम से विरोधी पार्टियों पर मसालेदार निशाने साध रही है। इन कार्टूनों को पार्टी वाट्सअप, ट्विटर और फेसबुक के माध्यम से लोगों तक पहुंचाती है। इस बार पार्टियों ने प्रचार सेल में विशेष तौर पर कार्टूनिस्टों को शामिल किया है, जो सुबह होते ही अपने कार्टून को सोशल मीडिया में अपलोड कर देते हैं। कुछ पार्टियों ने तो कैरेक्टर भी बना रखे हैं।
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आप के कार्टूनिस्ट पुष्पी आजाद ने बताया कि उन्होंने तो एक कैरेक्टर भी बना रखा है, जो विरोधी पार्टी के हर बयान व चुनावी घोषणा पत्र पर अपने बयान देता है। उनके अधिकतर कार्टून में भाई बरिका कैरेक्टर देखने को मिलता है। वह कहते हैं कि सुबह जल्दी उठकर वह सभी अखबारों को पढ़ते हैं। पार्टियों की गतिविधि देखते हैं। फिर सबसे चर्चित मुद्दे और बयान पर कार्टून बनाते हैं। उसके बाद वे उसे शेयर करते हैं। वे रोजाना चार से पांच कार्टून बनाते हैं।

इनमें सिद्धू, राहुल, कैप्टन और बादल शामिल होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके कई कार्टून विरोधी पार्टी कॉपी करती है। खासतौर पर कांग्रेस। अकाली के लिए काम कर रहे सोशल मीडिया के एक साथी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पार्टी की ओर से जो निर्देश आते हैं, उसी के मुताबिक कार्टून तैयार किए जाते हैं। कई बार हम लोग भी सलाह देते हैं, उसके बाद पार्टी के आला नेताओं के मुताबिक उसमें बदलाव किए जाते हैं।
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इसलिए कार्टून को ज्यादा महत्व दिया जाता

सोशल मीडिया - फोटो : demo
पंजाब के प्रसिद्ध राजनीतिक कार्टूनिस्ट परविंदर सिंह टोनी कलेर ने बताया कि यह पहली बार है, जब चुनाव में कार्टून को महत्व दिया जा रहा हो। दरअसल इस बार चुनावी मैदान में आम आदमी पार्टी भी है, जो सोशल मीडिया के माध्यम से काफी जोरदार तरीके से चुनाव प्रचार कर रही है। कार्टून के जरिए लोगों तक पहुंच बनाना भी आप पार्टी की देन है।

जब दूसरी पार्टियों ने देखा कि आप की ओर से कार्टून वायरल किए जा रहे हैं तो उन्होंने भी इसकी शुरुआत कर दी। दरअसल कार्टून वोटरों को सीधे प्रभावित करते हैं। एक लाइन पढ़ने से ही समझ में आ जाता है कि आखिर पार्टी क्या समझाना चाह रही है। खबरों को पढ़ने का समय किसी के पास होता नहीं। कार्टून की भाषा भी हल्की-फुल्की और लोकल होती है। इससे ग्रामीण इलाकों के लोग भी चटखारे लेकर समझ लेते हैं।

कार्टून से किसी बात को समझना काफी आसान होता है, इसलिए पार्टियां कार्टून इमेज को काफी तवज्जो दे रही हैं। पहले प्रचार के लिए लाउड स्पीकर, पोस्टर, स्टीकर का ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन चुनावी खर्च की सीमा तय होने के कारण अब इन पर ज्यादा गुंजाइश नहीं है। इसलिए कार्टून इमेज को वाट्सअप या फेसबुक के जरिए लोगों तक पहुंचाया जा रहा है, जो काफी प्रभावी हैं।
- डॉ. प्रमोद कुमार, वरिष्ठ मनोचिकित्सक, डॉ. प्रमोद क्लीनिक चंडीगढ़
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