डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलीजेंस मुंबई की टीम द्वारा विदेश में पाबंदी वाली दवाएं बेचने के आरोप में गिरफ्तार किए गए गिरोह के तार मोहाली से जुड़े थे। पता चला है कि गिरोह के मुख्य आरोपी ने फेज-6 में अपना कॉल सेंटर खोला था। वह गुमनाम तरीके से इसे चलाता था। उसने पांच से छह महीने तक के आर्डर यहां से बुक किए थे। डीआरआई की टीम ने चंडीगढ़ स्थित सम्राट के घर से कई दस्तावेज बरामद किए हैं। इससे पाबंदी वाली दवाएं विदेश में बेचने के पुख्ता प्रमाण मिले हैं।
विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सम्राट ने आरंभिक पूछताछ के दौरान यह कबूला है कि वह एक फर्जी कॉल सेंटर चलाता था। उसका उद्देश्य विदेशी ग्राहकों से पाबंदी वाली दवाओं का ऑर्डर लेना था। यह दवाएं भारत में बिना किसी मेडिकल प्रिसक्रिप्शन के बिकती हैं। लेकिन अमेरिका और यूके में इनकी बिक्री पर सख्ती है। साथ ही बिना डॉक्टरी प्रिसक्रिप्शन के यह दवाएं मार्केट में नहीं बिकती हैं।
डीआरआई के अधिकारियों ने बताया कि आर्डर लेने के बाद मुंबई स्थित कूरियर कंपनी चलाने वाले मनजीत सिंह को भेजे जाते थे।
मनजीत सिंह इन आर्डरों को हेल्थ सैंपलों के तौर पर बाहर भेज देता था। टीम ने मनजीत सिंह के पास से कुछ अन्य रिकॉर्ड भी अपने कब्जे में लिए हैं। वहीं, डीआरआई सूत्रों के मुताबिक, मुंबई में मारे गए छापे के दौरान 57 लाख की अल्प्राजोलम की गोलियों समेत आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पता चला है कि बीते पांच साल में दस करोड़ की पाबंदी वाली दवाएं बेची जा चुकी हैं।