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Chandigarh News: पंजाब के 115 ब्लॉक को डार्क जोन से निकालने के लिए इंटीग्रेटेड स्टेट वाटर प्लान तैयार

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अमर उजाला ब्यूरो
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चंडीगढ़। पंजाब में पानी की समस्या को दूर करने के लिए मान सरकार विशेष कदम उठाने जा रही है। अब राज्य के 153 में से 115 ब्लॉकों को डार्क जोन से बाहर निकाला जाएगा। इस संदर्भ में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शुक्रवार को राज्य में इंटीग्रेटेड स्टेट वाटर प्लान लागू करने के आदेश दिए। पानी की कमी को दूर करने के साथ इसकी संभाल को लेकर सरकार द्वारा बनाए गए एक्शन प्लान में 14 अहम बिंदुओं को शामिल किया गया है। सीएम मान ने भू-जल संरक्षण और जलस्तर को बढ़ाने के लिए एकीकृत प्रांतीय जल योजना के हिस्से के रूप में 14 सूत्री कार्य योजना को मंजूरी दी। इस बैठक के दौरान कैबिनेट मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डीयां, हरदीप सिंह मुंडियां और तरुणप्रीत सिंह सौंद भी मौजूद थे।

मुख्यमंत्री मान ने कहा कि 520 करोड़ क्यूबिक मीटर भूजल निकालने के कारण जल स्तर में औसतन 0.7 मीटर की वार्षिक गिरावट दर्ज की जा रही है। उन्होंने कहा कि कृषि के लिए भूजल की मांग को कम करके, सिंचाई तकनीकों में सुधार करके, भूजल स्तर में सुधार और कृत्रिम रूप से भूजल पुनर्जनन में वृद्धि के माध्यम से इस लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य लगभग 15,79,379 हेक्टेयर क्षेत्र को पारंपरिक सिंचाई विधियों के बजाय जल-बचत तकनीकों जैसे ड्रिप सिंचाई, स्प्रिंकलर सिंचाई और अन्य उद्देश्यों के तहत लाना चाहिए ताकि दक्षता बढ़ाकर पानी की मांग और बर्बादी को कम किया जा सके।
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ये हैं एक्शन प्लान के मुख्य बिंदु
-प्लान के तहत उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी जहां खुले हेड उपलब्ध हों और जहां पाइपलाइन का प्रयोग किया जा सकता हो।
-अतिरिक्त उपलब्ध पानी को नहरों और वितरकों से सीधे आसपास के तालाबों में वितरित किया जाएगा। चेक डैम और नए तालाबों का निर्माण किया जाएगा।
पंजाब को विभिन्न क्षेत्रों में विभाजित किया जाएगा, जिससे पानी के प्रवाह, मिट्टी के कटाव को नियंत्रित करने और आवश्यक तत्वों को बनाए रखा जा सकेगा।
-योजना के तहत बाढ़ मॉडलिंग और मैपिंग, फ्लड प्लेन जोनिंग और सार्वजनिक भागीदारी के लिए अनुसंधान और अध्ययन किए जाएंगे।
घग्गर के बाढ़ के पानी को संग्रहित कर चेक डैम के माध्यम से कृषि के लिए उपयोग में लाना ही योजना का उद्देश्य है।
यह योजना कंपनीज एक्ट, 2013 के कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) के तहत पानी प्रबंधन में निजी क्षेत्र की भागीदारी भी सुनिश्चित करेगी।
-सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना, जल संरक्षण ढांचे और माइक्रो सिंचाई प्रणाली को प्रोत्साहित करने के लिए गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।
-धान (परमल) और पानी की अधिक खपत करने वाली धान की किस्मों वाले क्षेत्र को कृषि विविधता के तहत मक्का, कपास, बासमती और अन्य संभावित फसलों के तहत लाना भी योजना का हिस्सा है।
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