कृषि मंत्री व कांग्रेस विधायक किरण चौधरी में हुई थी शुक्रवार को फसल बीमा योजना पर बहस
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के स्वैच्छिक होने का मुद्दा सोमवार को दूसरे दिन भी विधानसभा में गूंजा। इस पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए स्वैच्छिक है। केवल ऋणी किसानों की ही सरकार किश्त काटती है, जो योजना के पंजीकरण के लिए निश्चित तिथि से सात दिन पहले तक सूचना नहीं देते। उनकी हां समझकर किश्त राशि काटी जाती है। यदि किसान सूचना दे दे कि उसकी किश्त नहीं कटनी चाहिए तो उससे राशि नहीं ली जाती। मुख्यमंत्री शुक्रवार की कार्रवाई को रिकॉर्ड से निकालने की बात कहकर मामले को शांत किया। इससे पहले कृषि मंत्री जेपी दलाल ने सदन में उन्हें झूठा कहने वाले सदस्यों से माफी मांगने की बात रखी।
शुक्रवार को कृषि मंत्री जेपी दलाल व कांग्रेस विधायक किरण चौधरी के बीच प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के स्वैच्छिक होने पर बहस हुई थी। सत्तापक्ष इसे स्वैच्छिक तो विपक्ष इसे जबरन वसूली बता रहा था। कांग्रेस विधायकों ने कृषि मंत्री के इस्तीफे की बात कही थी। सोमवार को दोपहर बाद शुरू हुई सदन की कार्रवाई में कृषि मंत्री जेपी दलाल ने यह मुद्दा फिर उठाया और कहा कि फसल बीमा योजना पर मंत्री को झूठा कहने वाले सदस्य सदन से माफी मांगें।
ये है प्रदेश में फसल बीमा योजना की तीन साल स्थिति-
वर्ष
पंजीकृत फसल
2020-21
11212831
2021-22
11091773
2022-23
11025575
कुल
33330179 एकड़ई-खरीद के लिए इस योजना के आधार पर जारी राशि
वर्ष
जारी राशि
2020-21
27589
2021-22
18360
2022-23
28589
कुल
74378 करोड़
योजना में फर्जी मामले
वर्ष
मामले
2020-21
0
2021-22
1
2022-23
20
आंकडे विधायक आफताब अहमद के सवाल पर सरकार द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर।