चंडीगढ़। सेक्टर-18 स्थित टैगोर थिएटर में शनिवार को महक दियां तंदा अकादमी की ओर से नाटक अत दा अंत का मंचन हुआ। नाटक में वर्तमान समय में चल रही समस्याओं पर प्रकाश डाला है। इसमें नशा तस्करी, कुदरत से खिलवाड़, बच्चों में रिश्तों की कम समझ के बारे में दिखाया गया। इसके साथ पंजाब के अलोप हो रहे लोक नृत्य जिसमें लुड्डी, भंगड़ा और गिद्दा को भी बेहतरीन तरीके से पेश किया गया। नाटक में नशा तस्करी के बारे में दिखाया गया। एक इंस्पेक्टर द्वारा नशा तस्करों को बचाने, दूसरों को झूठे केस में फंसाने और रिश्वत लेने का जिक्र है। लेकिन नशे की ओवरडोज के करण इंस्पेक्टर के दोनों बेटे मर जाते हैं, तब उसे पता चलता है कि जिंदगी क्या है। इसके गम में वह आत्महत्या कर लेता है। आत्महत्या करने से पहले उसकी लिखी चिट्ठी ने सभी को भावुक कर दिया। चिट्ठी में उसने लिखा कि मेरा कोई ईमानदार दोस्त नहीं है जिसे में अपनी बात बता सकूं।
मलकियत मलंगा द्वारा लिखित नाटक में प्रकृति के साथ खिलवाड़ के भयावह परिणामों को भी दिखाया गया। लोगों ने नदी-नाले भी बेच दिए। लेकिन जब प्रकृति अपने पर आती है तो सभी का हिसाब कर देती है। भारी बारिश के बाद बाई बाढ़ में कई मकान बह गए।
इसके अलावा ईमानदारी को लेकर भी दिखाया गया है कि इमानदार लोगों को केवल सरपंच तक ही सीमित रखते हैं। उन्हें विधायक और सांसद नहीं बना रहे हैं। जो लोग काबिल नहीं है उन्हें पुरस्कार प्रदान किया जा रहा है। इसके अलावा बाबाओं पर भी कटाक्ष किया गया। दिन में बाबा आते हैं और रात में भैंस चोरी कर लेते हैं। नाटक में ट्यूशन फीस पर भी कटाक्ष किया गया कि यदि स्कूल में बेहतर पढ़ाई हो तो फिर ट्यूशन की क्या जरूरत है।
मलकियत सिंह ने बताया कि दो महीनों की कार्यशाला के दौरान यह नाटक तैयार किया गया। इसमें पांच से 60 वर्ष के 70 कलाकारों ने प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कलाकारों ने लुड्डी, गिद्दा भी पेश किया। डेढ़ घंटे की अवधि के इस नाटक में हंसी और भावुक करने वाले दृश्य शामिल रहे। नाटक में खुशप्रीत सिंह, तेजिंदर तृप्त, गुरकीरत कौर, हरप्रीत कौर, कबीर, राजबीर, रोहित चौहान, जसकीरत, सतविंदर सिंह, मंदीप सिंह सहित अन्य कलाकारों ने मंचन किया।