हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले हजकां-भाजपा का गठबंधन टूट गया। इसके पीछे मुख्य 4 कारण हैं। प्रदेश की राजनीति में अब नए समीकरण तो बनेंगे लेकिन पहले वे कारण भी मायने रखते हैं, जिनके कारण ये गठबंधन टूटा। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह द्वारा बार-बार हजकां सुप्रीमो कुलदीप बिश्नोई को बातचीत के लिए टालना पहला बड़ा कारण है
दूसरा कारण ये है कि सूत्र बताते हैं कि जनचेतना पार्टी के अध्यक्ष विनोद शर्मा को लोकसभा चुनाव से पहले हजकां में कुलदीप बिश्नोई शामिल करवाना चाहते थे। पार्टी ने गुड़गांव में प्रेस वार्ता की तैयारी भी कर ली थी, लेकिन एन वक्त पर सुषमा स्वराज के ट्विट ने खेल बिगाड़ दिया। इसके कारण सारा मामला खटाई में पड़ गया।
इस बीच कुलदीप बिश्नोई ने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के सामने यह मुद्दा रखा कि पार्टी जिन्हें अपनी मर्जी से ज्वाइन करवा रही है वह ईमानदार है और जिसे वे लाना चाहते हैं उसे दागदार बताया जा रहा है।
मोदी की रैली में नहीं बुलाया
तीसरा कारण लोकसभा चुनाव में करनाल सीट की उम्मीदवारी का था। उस समय चंद्रमोहन को पार्टी ने करनाल लोकसभा सीट से उतारा। उस समय भाजपा के केंद्रीय नेताओं का फोन आ गया कि करनाल सीट उन्हें चाहिए। ऐसा न होने की स्थिति में भाजपा सभी दस सीटों पर अकेले लड़ेगी और हजकां अपनी अकेले लड़ने की तैयारी कर ले। मन मार कर हजकां ने सिरसा सीट से डा. सुशील इंदौरा को उतारा। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रामबिलास शर्मा, केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर, हरियाणा प्रभारी जगदीश मुखी, सह प्रभारी अनिल जैन सभी से कुलदीप की बैठक हुई, लेकिन फैसला शाह पर छोड़ दिया गया।
मोदी की रैली में कुलदीप को न बुलाना भी गठबंधन में गांठ का चौथा बड़ा कारण बना। हालांकि मोदी की कैथल रैली में कुलदीप के लिए अलग से सीट निर्धारित की गई थी, लेकिन कुलदीप उस दिन दिल्ली में थे। प्रेस वार्ता में कुलदीप ने इसका बार-बार जिक्र भी किया कि रेवाड़ी रैली में बुलाना तो दूर, मोदी ने उनके नाम का जिक्र तक नहीं।
भाजपा धोखेबाज पार्टी
हरियाणा से बड़ी खबर आ रही है। सीटों के बंटवारे को लेकर हुए विवाद में हरियाणा जनहित कांग्रेस पार्टी ने भाजपा से नाता तोड़ लिया है। पार्टी सुप्रीमो कुलदीप बिश्नोई ने चंडीगढ़ में प्रेस वार्ता में गठबंधन तोड़ने का ऐलान किया। अब वह कांग्रेस के पूर्व नेता विनोद शर्मा की जन चेतना पार्टी को अपना नया सहयोगी बनाएगी।
भाजपा को धोखेबाज पार्टी करार देते हुए बिश्नोई ने बताया कि भाजपा ने हमेशा मुझे नीचा दिखाने की कोशिश की है। करनाल में मेरे उम्मीदवार को बीजेपी ने बदलवाया। वादा करके मोदी मेरी रैली में नहीं आए। रेवाड़ी रैली में मोदी ने मेरा नाम तक नहीं लिया। विनोद शर्मा को भाजपा में शामिल होने के लिए सुषमा स्वराज ने रोका।
लोकसभा चुनाव से ही भाजपा की मंशा खराब
कुलदीप ने आगे बताया कि लोकसभा सीटों पर भाजपा ने हमें 2 सीटें दी, जबकि खुद 8 सीटों पर लड़े। उन दोनों सीटों पर भाजपा ने ही हमें हराया। भाजपा हमें शुरू से ही धोखा देती आ रही है। लोकसभा चुनाव से ही भाजपा की मंशा खराब थी और हमारी शुरू से ही नीयत साफ थी।
चाहे मोदी की रैली थी, सुषमा की रैली थी, राजनाथ की रैली थी, हमने शुरू से ही पार्टी के दिग्गज नेताओं को उनकी रैली में भेजा, लेकिन भाजपा ने पल-पल हमारे साथ धोखा किया। 80 फीसदी गांवों में हमारा जनाधार है।
हम जनता के प्रति जवाबदेह हैं। भाजपा ने केवल मुझे नहीं, देवी लाल, ओम प्रकाश चौटाला को भी धोखा दिया। हम इस धोखेबाज पार्टी का साथ नहीं देंगे। हम जनता के दरबार में अकेले जाएंगे।
इतना कहते हुए कुलदीप बिश्नोई ने भाजपा से तीन साल पुराना नेता करार खत्म करते हुए गठबंधन तोड़ने का ऐलान कर दिया। अब हजकां अकेले दम पर हरियाणा विधानसभा चुनाव में उतरेगी।