चंडीगढ़ में सेक्टर-32 के पीजी में 22 फरवरी को आग लगने से तीन लड़कियों की मौत बीट ऑफिसर और बिल्डिंग इंस्पेक्टर की लापरवाही का नतीजा है। अगर यह अपना काम सही से करते तो पीजी में आग नहीं लगती। यह खुलासा इस अग्निकांड की जांच रिपोर्ट में हुआ है। साथ ही कहा गया है कि मकान मालिक और संचालक इसके लिए जिम्मेदार हैं।
सेक्टर-32 स्थित एक पेइंग गेस्ट (पीजी) में आग लगने से तीन लड़कियों की मौत के मामले की जांच के लिए गठित कमेटी ने अपनी रिपोर्ट डीसी मनदीप सिंह बराड़ को सौंप दी है। रिपोर्ट में आग लगने का कारण शॉर्ट-सर्किट बताया गया है। मकान में प्लास्टिक से पार्टिशन किया गया था, जिसकी वजह से आग तेजी से भड़की और पूरे मकान को अपनी चपेट में ले लिया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मकान मालिक और पीजी संचालक ने नियमों को पूरा किया होता तो किसी तरह की जान का नुकसान नहीं होता। इसके अलावा स्थानीय बीट ऑफिसर ने चेकिंग नहीं की। मकान में कई तरह के अवैध निर्माण किए गए थे, जिसकी बिल्डिंग इंस्पेक्टर ने कभी जांच नहीं की। अगर ये सभी अपना काम सही से करते तो किसी की जान नहीं जाती।