कूड़े की ढुलाई के लिए दौड़ती थी ट्रेन
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क्या आप जानते हैं कि अंग्रेजों के समय में कूड़ा ढोने के लिए अमृतसर से एक ट्रेन चलती थी। इसके लिए उसमें दौ पैसेंजर डिब्बे और 40 वैगन लगे होते थे। इंडियन रेलवे का इतिहास लंदन स्थित ब्रिटिश म्यूजियम लाइब्रेरी की फाइलों में दर्ज है। भारत में अंग्रेजों ने अपनी सुविधा के लिए रेल पटरी बिछाकर तमाम कार्य किए हैं।
रेल को क्षेत्र की सफाई के लिए भी इस्तेमाल किया है। वर्ष 1882 में अमृतसर की म्यूनिसिपल कारपोरेशन दो फुट चौड़ी और पांच मील लंबी रेल पटरी बिछाकर रोबर्ट हुतसों इंजन के पीछे चालीस वैगन लगाकर क्षेत्र के गारबेज की ढुलाई करती थी, इस बात का जिक्र ब्रिटिश म्यूजियम लाइब्रेरी में है।
रेलवे के इतिहास को जानने के लिए रेल डिवीजन फिरोजपुर के डिवीजनल आपरेटिंग मैनेजर (डीओएम) एसपी सिंह भाटिया अपने निजी खर्चे पर दो सप्ताह के लिए लंदन गए थे। वहां से ब्रिटिश म्यूजियम लाइब्रेरी से इंडियन रेलवे के इतिहास संबंधी तमाम जानकारी जुटाकर भारत लौटे हैं।
डीओएम भाटिया का कहना है कि इस बात की किसी को भी जानकारी नहीं होगी कि अमृतसर में 14 दिसंबर 1882 में म्यूनिसिपल कारपोरेशन ने दो फुट चौड़ा और पांच मील लंबा ट्रैक बिछाकर छोटी ट्रेन के जरिये क्षेत्र का कचरा उठाया करती थी। उक्त ट्रैक पर दौड़ने वाले इंजन का नाम रोबर्ट हुतसों था, जो लंदन के शहर लीड्स में हुडसवेल क्लार्क कंपनी ने तैयार किया था और भारत में इसकी सप्लाई मार्टिन एंड कंपनी ने की थी। ट्रेन को दौड़ाने के लिए ट्रैक फोलर कंपनी ऑफ लीड ने भारत भेजा था।
इंजन के साथ दो पैसेंजर डिब्बे और चालीस वैगन लगते थे, जिससे गार्बेज की ढुलाई की जाती थी। अंग्रेज इस तरह अमृतसर शहर को साफ सुथरा रखते थे, क्योंकि अंग्रेज अधिकारियों का अमृतसर से पाकिस्तान आना जाना रहता था। पाकिस्तान से भी कई ट्रेनें अमृतसर आती थीं। अमृतसर एक ऐतिहासिक स्थल था, यहां पर अंग्रेज अधिकारी आते-जाते थे। इसीलिए क्षेत्र का गारबेज उठाने के लिए छोटी ट्रेन का इस्तेमाल करते थे, ट्रैक इस किस्म का था कि इसे बिछाने और मोड़ने में कोई परेशानी नहीं होती थी।