कश्मीर घाटी स्थित एलओसी (लाइन ऑफ कंट्रोल) के नौशेरा सेक्टर में इंडियन आर्मी के पराक्रम की एक मिसाल आज भी कायम है। यह मिसाल जहां पाकिस्तान के लिए पिछले 34 सालों से टीस बनी हुई है, वहीं इस बात से खिझा पाकिस्तान आज भीइस सेक्टर को हमेशा डिर्स्टब करने में लगा रहता है। पाक इस सेक्टर में आए दिन सीज फायर का उल्लंघन कर फायरिंग व गोलाबारी करता रहता है। जबकि भारतीय सेना भी पाक की इस गुस्ताखियों का जवाब देने में पीछे नहीं रहती।
घुसपैठ, तस्करी का सेफ जोन थी नौशेरा सेक्टर की चौकी
पाकिस्तान ने नौशेरा सेक्टर में एलओसी पार अपनी हद में एक चौकी स्पेशल घुसपैठियों और नशा तस्करों को सेफ कवर देने के लिए बनाई हुई थी। इस चौकी से पाकिस्तान आए दिन फायरिंग और गोलाबारी करता रहता था। इंडियन फोर्स भी इससे डिस्टर्ब होती और इसी आड़ में घुसपैठिए और नशा तस्कर भारतीय सीमाओं में घुस जाते थे। काफी समय तक यह सिलसिला चलता रहा।
अंतत: भारतीय सरकार ने 1983 में फैसला किया कि इस चौकी को नेस्तनाबूद कर दिया जाए। इसके लिए इंडियन फोर्स की दो विभिन्न रेजिमेंटों की टुकड़ियों को यह जिम्मेवारी दी गई थी। लेकिन इस चौकी के थोड़ी दूरी पर ही पाकिस्तान की एक और चौकी होने की वजह से इस पोस्ट पर कब्जा करना मुश्किल था। अंतत: यह टास्क गोरखा रेजिमेंट को दी गई और जनवरी 1983 में गोरखा रेजिमेंट ने इस चौकी पर हमला कर अपने कब्जे में ले लिया।