पड़ोसी जिला कपूरथला से एक खिलाड़ी कृष्ण बहादुर पाठक जीके हैं। 10 में से चार खिलाड़ी टीम के कैप्टन हरमनप्रीत सिंह, गुरजंट सिंह, शमशेर सिंह, जरमनजीत सिंह बल गुरु नगरी अमृतसर से हैं। यह दूसरा मौका है जब एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली पुरुष हाकी टीम में 10 खिलाड़ी सिर्फ पंजाब से हैं। 1966 के बैंकाक एशियन गेम्स में भी पुरुष हॉकी टीम ने पहली बार गोल्ड जीता था। उस विजेता हाकी टीम में भी 10 खिलाड़ी पंजाब से ही थे।
सुरजीत हॉकी अकादमी के सुरिंदर सिंह भापा का कहना है कि एशियन गेम्स में पंजाबियों ने एक फिर से अपना लोहा मनवाया और इतिहास को दोहरा कर नौ साल बाद स्वर्ण पदक पर कब्जा किया। भारतीय पुरुष हाकी टीम ने अब तक 1966, 1998 और साल 2014 एशियन गेम्स में फाइनल जीत कर स्वर्ण पदक पर कब्जा किया था।
जालंधर ने हमेशा भारतीय हॉकी टीम में रीढ़ की हड्डी का काम किया है। कुछ समय के लिए भारतीय हॉकी जरूर राजनीति का शिकार हो गई थी, लेकिन अब खेल भावना जबरदस्त पैदा हुई है। शुक्रवार के मैच को बारीकी से देखे तो कोई खिलाड़ी अपने नहीं खेलता दिखाई दिया, वह भारत के तिरंगे के लिए खेल रहा था।
कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने शानदार खेल दिखाया। उन्होंने सबसे ज्यादा दो गोल दाग कर जापान को बैकफुट पर कर दिया। उनके बाद मनप्रीत सिंह, अभिषेक व अमित रोहिदास ने भी 1-1 गोल कर टीम में योगदान दिया।
हॉकी के कप्तान रह चुके अर्जुन अवार्डी गगनअजीत सिंह का कहना है कि भारत ने जब शुरुआती दिनों में ओलंपिक में खेलना शुरू किया था, तब वह कई टीमों पर दो अंकों में जीत दर्ज किया करती थी। 1932 के ओलंपिक में अमेरिका पर हासिल की 24-1 की जीत की अक्सर चर्चा होती रही है।
भारत ने इस एशियाई खेलों में पूल मुकाबलों में पाकिस्तान सहित चार टीमों पर दो अंकों वाली जीत पाकर पुराने दिनों की याद ताजा कर दी। परंपरागत प्रतिद्वंद्वी मानी जाने वाली पाकिस्तान को 10-2 से हराना टीम का मनोबल बढ़ाने वाला रहा। पाकिस्तान पर एक बड़ी जीत ने भारतीय हॉकी टीम में खासा उत्साह पैदा किया। एशियन गेम्स 2023 में भारतीय हॉकी टीम ने कुल 68 गोल दागे हैं और खिलाफ में केवल नौ गोल लगे हैं।
जालंधर की सुरजीत हॉकी अकादमी से निकले हैं हरमनप्रीत सिंह
हरमनप्रीत सिंह का पालन-पोषण अमृतसर के एक किसान परिवार में हुआ। हरमनप्रीत ने पिछले साक्षात्कारों में स्वीकार किया है कि खेतों में अपने पिता की सहायता करने की उनकी क्षमता ने उन्हें हॉकी के खेल में महत्वपूर्ण योगदान देने की अनुमति दी है। जब वे 10 वर्ष के थे, तब उन्होंने पहली बार हॉकी खेलना शुरू किया।
उन्होंने फॉरवर्ड बनने के इरादे से 15 साल की उम्र में सुरजीत सिंह हॉकी अकादमी (जालंधर) में दाखिला लिया। सुरजीत हॉकी अकादमी के सुरिंदर सिंह भापा व रिटायर पीसीएस इकबाल संधू और राणा टुट का कहना है कि हरमनप्रीत सिंह ने पहली बार भारत की अंडर-19 टीम के लिए खेलते हुए ध्यान आकर्षित किया था, जब उन्होंने मलेशिया में सुल्तान जोहोर कप में 9 गोल दागे। उनकी उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए मैन ऑफ द टूर्नामेंट का पुरस्कार मिला।