लेटर में इन युवकों को दिसंबर 2018 और जनवरी 2019 की अलग-अलग तारीखों को सुबाथू कैंट एरिया में संबंधित ट्रेनिंग सेंटर में सुबह 8 बजे रिपोर्ट करने को भी कहा गया। साथ ही उन्हें अपने साथ ओरिजनल सर्टिफिकेट व अन्य पहचान संबंधी दस्तावेज भी लाने को कहा गया। युवकों को पत्र में उनकी ट्रेनिंग शुरू होने की तारीख भी बताई गई।
इस कॉल लेटर में कर्नल रैंक के दो आर्मी अफसरों के साइन और मुहर भी है। साथ ही इस पत्र पर सुबाथू स्थित आर्मी के संबंधित ट्रेनिंग सेंटर की स्टांप लगी हुई है। सेना ने संबंधित कॉल लेटर, कर्नल रैंक के अफसरों (जिनका नाम कॉल लेटर में इस्तेमाल किया गया है) व मुहरों की तफ्तीश करवाई, तो यह सब कुछ ही फर्जी पाया गया।
युवकों को बांटी फौज की वर्दियां, किट
रिपोर्ट में यह भी सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि भर्ती का झांसा देकर गिरोह ने जिन नेपाली युवकों को फांसा गया है, उन्हे सेना की वर्दियां और बेसिक किट तक उपलब्ध करवा दी गई हैं। ये वर्दियां और किट कहां से आई, इसे लेकर भी सैन्य प्रशासन पूरी तरह से गंभीर और चौकस है।
अंबाला रिक्रूटमेंट हेडक्वार्टर का भी फर्जी रेफरेंस लेटर
गिरोह के सदस्यों ने नेपाली युवकों को अंबाला आर्मी बेस कैंप स्थित रिक्रूटमेंट ऑफिस का रेफरेंस लेटर भी उपलब्ध करवाया है। इस पर भी कर्नल के हस्ताक्षर व ट्रेनिंग सेंटर की मुहर लगी है। इस रेफरेंस लेटर में लिखा है कि युवाओं के सेकेंड ग्रुप की सुबाथू ट्रेनिंग सेंटर में जनरल ड्यूटी के लिए चयन हो गया है। ज्वाइनिंग के दो माह बाद उन्हे वेतन दिया जाएगा। लेकिन सैन्य जांच में ये रेफरेंस लेटर भी फर्जी पाया गया।