होम्योपैथी में धीरे धीरे मरीजों का रुझान बढ़ रहा है। सेक्टर-26 के होम्योपैथिक मेडिकल कालेज और अस्पताल की प्रिंसिपल डॉ. अंशु ने कहा कि हौम्योपेथी से गंभीर बीमारियों का इलाज किया जा रहा है। खास बात यह है कि इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है।
उनका मानना है कि होम्योपैथी में बीमारी पर नहीं बल्कि मरीज के दिमाग पर काम किया जाता है, क्योंकि किसी भी बीमारी से ग्रस्त होने के बाद सबसे पहले मरीज का दिमाग प्रभावित होता है। इसके अलावा प्रतिरक्षा तंत्र पर काम किया जाता है, क्योंकि इसके कमजोर होने से लोग अधिकत्तर बीमारियों का शिकार होते हैं। यहां अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 150 के करीब मरीज आ रहे हैं। वायरल के दिनों में यह संख्या 200 तक भी चली जाती है।
उन्होंने कहा कि लोग सोचते हैं कि होम्योपैथी केवल मीठी गोलियां हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। यह केवल मीठी गोलियां नहीं बल्कि एक नियमित इलाज है। गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर, सोराइसिस, किडनी स्टोन, अस्थमा समेत अन्य में यह लाभकारी साबित हो रही हैं। इसमें मरीजा को दवाईयां भी बहुत कम मात्रा में दी जाती है। गर्भवस्था और बुजुर्गों के इलाज में भी होम्योपैथी के बेहतर परिणाम देखने को मिल रहे हैं।
एलोपैथी इलाज के साथ भी खा सकते हैं दवाएं
उन्होंने कहा कि यदि किसी बीमारी का एलोपैथी इलाज चल रहा है, उसके साथ साथ होम्योपैथी दवाएं खा सकते हैं। क्योंकि इसमें मरीज को कम मात्रा में दवाईयां दी जाती हैं, उनका कोई भी नुकसान नहीं होता। होम्योपैथिक इलाज के दौरान तम्बाकू, पान-मसाला, गुटका, सुपारी, धूम्रपान आदि से बचें रहने की सलाह दी जाती है।
अस्पताल के अंदर से ही दी जाती हैं दवाईयां
खास बात है कि इसमें होम्योपैथिक दवाइयां प्राकृतिक पौधों, जानवरों और सिंथेटिक स्रोतों से तैयार की जाती हैं, और उन्हें पानी में घोलकर तैयार किया जाता है। यह आमतौर पर सुरक्षित है। अस्पताल में मरीजों को बाहर के मेडिकल स्टोरों से दवाई लेने के लिए न तो लिखा जाता है और न ही कहा जाता है। सभी दवाईयों बहुत ही सस्ते दामों पर अंदर से उपलब्ध होती हैं।
एविडेंस आधारित हो रही है रिसर्च
उन्होंने बताया कि होम्योपैथी में पढ़ाई को लेकर लड़कियां ज्यादा आ रही हैं। कालेज में 150 के करीब विद्यार्थी हैं। इसमें अधिकत्तर लड़कियां ही हैं। उन्होंने कहा कि यहां के अधिकत्तर डॉक्टर्स रिसर्च कर रहे हैं। यह रिसर्च एविडेंस आधार पर हो रही हैं। इसका अर्थ है शोधकर्ता अपने निष्कर्षों को स्थापित करने के लिए पहले से मौजूद ठोस सबूतों और डेटा पर निर्भर रहते हैं। इसमें एलर्जी, खाना खाने की आदतों पर रिसर्च की जा रही है। उन्होंने कहा कि होम्योपैथी में दिमागी लक्षणों, परिवारिक सदस्यों की हिस्ट्री, गर्भवती मां की हिस्ट्री को महत्वता दी जाती है।