खेलों के इतिहास में पहली बार नेशनल कैंप में पहलवानों के बीच कुश्ती नहीं कराई जा रही है। सोनीपत के साई सेंटर में पुरुष पहलवान और लखनऊ में महिला पहलवान नेशनल कैंप में शामिल जरूर हो गए हैं, लेकिन अभी तक कुश्ती का दांवपेंच अभी तक एक-दूसरे पर नहीं आजमाया है। क्योंकि कोरोना के कारण केवल दौड़, रोलिंग, जिम आदि का अभ्यास कराया जा रहा है और किसी पहलवान को दांव लगाने की प्रैक्टिस करनी है तो वह बिना कुश्ती लड़े अकेले ही प्रैक्टिस कर सकता है।
कोरोना के कारण नेशनल कैंप स्थगित होने पर पहलवान काफी समय तक कुश्ती से दूर रहे थे। सरकार के साई सेंटर खोलने की अनुमति मिलने के बाद एक सितंबर से सोनीपत में पुरुष पहलवानों का कैंप शुरू किया गया था। जबकि महिला पहलवानों का कैंप लगातार आगे खिंचता चला गया और वह 10 अक्तूबर से लखनऊ के साई सेंटर में शुरू किया गया। जहां पहलवानों को एक सप्ताह तक कमरे में रहना पड़ा तो उसके बाद भी पहलवान दांवपेंच लगाने के लिए आपस में कुश्ती नहीं लड़ सकते हैं।
खेलों के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है कि पहलवानों का नेशनल कैंप बिना कुश्ती लड़े चलाया जा रहा है। पहलवानों को कोच केवल दौड़, रोलिंग, जिम आदि करा रहे है। इस तरह नया दांवपेंच अभी तक नेशनल कैंप में पहलवान नहीं सीख सके है तो वह अपनी कमियां भी फिलहाल दूर नहीं कर सकते है।