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Chandigarh News: पीजीआई के 38वें दीक्षांत समारोह में 107 मेधावियों को पदक और 1547 स्नातकों को प्रदान की गई डिग्री

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चंडीगढ़। पीजीआई सिर्फ सीखने की जगह नहीं है, यह आकांक्षा और एकता का प्रतीक है। आप जिस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं, वह मानवीय भावना की ताकत का प्रमाण है। याद रखें कि आपका ज्ञान और कौशल सिर्फ आपके लिए नहीं बल्कि मानवता की सेवा के लिए है। ये बातें नीति आयोग के सदस्य प्रो. विनोद के पॉल ने रविवार को पीजीआई के 38वें दीक्षांत समारोह में कहीं। समारोह में वह मुख्य अतिथि थे। दीक्षांत समारोह में संस्थान के 107 मेधावियों को उनकी शैक्षणिक प्रतिभा के लिए पदक देकर सम्मानित किया गया और 1547 स्नातकों को डिग्री प्रदान की गई। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में पहुंचे पीजीआई के पूर्व निदेशक प्रो. जगतराम ने छात्र-छात्राओं को डिग्री प्रदान की। प्रो. विनोद के पॉल ने छात्रों में उत्साह भरते हुए कहा कि अगले 25 वर्षों में हमें विश्व के शीर्ष 25 संस्थानों में शामिल होना है। इसके लिए हमारे पास पीजीआई जैसे सर्वोत्तम संस्थान हैं जो बेजोड़ क्षमता और भविष्य को आकार देने में जुटे हुए हैं। उन्होंने डिग्री पाने वाले छात्र-छात्राओं से कहा कि अब आप एक ऐसी परंपरा का हिस्सा हैं जो उत्कृष्टता और सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के साथ खड़ी है। अपनी नई भूमिका के साथ आने वाली जिम्मेदारी को स्वीकार कर इस विरासत का सम्मान करें। देश को पहले और खुद को हमेशा बाद में रखें। साथ ही उन्होंने आह्वान करते हुए कहा कि आइए हम भारत माता के प्रति खुद को फिर से समर्पित करें और विकसित भारत-2047 के दृष्टिकोण के लिए हाथ मिलाएं। कहा कि हम वर्षों के समर्पण और कड़ी मेहनत की पराकाष्ठा का जश्न मना रहे हैं। यह दीक्षांत समारोह सिर्फ एक मील का पत्थर नहीं है, यह पेशेवर उत्कृष्टता की एक नई यात्रा की ओर पहला कदम है। इस अवसर पर पीजीआई की सारथी प्रोजेक्ट से संबंधित बुकलेट भी लांच की गई।
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