पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक रेप पीड़िता की याचिका पर फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि जघन्य अपराध की स्थिति में एफआईआर से पहले प्राथमिक जांच जरूरी नहीं है।
याचिका दाखिल करते हुए पीड़िता ने कहा कि वह लोगों के घर में मेड का काम करती थी। एक दिन गलती से उसके फोन से एक नंबर मिल गया। इसके बाद लगातार उस व्यक्ति के उसे कॉल आने लगे। उस व्यक्ति ने उसे नौकरी का झांसा दे बठिंडा बुलाया और वहां पर दो लोगों ने उसके साथ रेप किया। जब तीसरा व्यक्ति रेप का प्रयास कर रहा था तो वह किसी तरह से वहां से भागी और खुद का मेडिकल करवाया। इसके बाद वह पुलिस के पास पहुंची लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया। इसके बाद याची ने मजिस्ट्रेट के पास शिकायत दी।
इस पर मजिस्ट्रेट को बताया गया कि शिकायतकर्ता झूठा केस दर्ज करवा रही है। पहले प्राथमिक जांच पूरी की जाएगी फिर आगे कार्रवाई होगी। इस पर मजिस्ट्रेट ने पीड़िता के खिलाफ फैसला सुना दिया। इस पर याची ने हाईकोर्ट की शरण ली। हाईकोर्ट ने अब मजिस्ट्रेट के फैसले को पलटते हुए कहा कि इस प्रकार के मामलों में तुरंत एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज न कर पुलिस ने अपनी ड्यूटी में कोताही की है। कोर्ट ने अब यह केस नए सिरे से निर्णय लेने के लिए मजिस्ट्रेट को भेज दिया है।