-सर्वे कमेटी का होगा गठन, उसकी रिपोर्ट के आधार पर आवंटित होंगे टिकट
-चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान की अध्यक्षता में हुई बैठक में सर्वे कमेटी गठन का लिया गया निर्णय
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। लोकसभा चुनाव में झटका मिलने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने तीसरी बार हरियाणा में भाजपा की सरकार बनाने का रोडमैप तैयार कर लिया है। इसके लिए भाजपा ने पहला बड़ा फैसला ये लिया है कि विधानसभा चुनावों में सिफारिश के आधार पर नेताओं को टिकट नहीं दिए जाएंगे, बल्कि सर्वे के आधार पर ही नेताओं को चुनाव में उतारा जाएगा। इसमें बाकायदा जातिगत और क्षेत्रीय समीकरणों का भी ख्याल रखा जाएगा। खासतौर पर भाजपा में इसके लिए एक सर्वे कमेटी का गठन किया जाएगा। इस कमेटी में हरियाणा प्रभारी धमेंद्र प्रधान, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी समेत अन्य वरिष्ठ नेता शामिल होंगे।
रविवार को रोहतक में हुई भाजपा की अहम बैठक में यह फैसला लिया गया है। इस बैठक में केंद्रीय मंत्री व हरियाणा विधानसभा चुनावों के प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान के साथ हरियाणा मामलों के प्रभारी बिप्लब कुमार देब, सीएम नायब सिंह सैनी, केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल व कृष्णपाल गुर्जर के अलावा हरियाणा सरकार के कई मंत्री और विधायक मौजूद रहे। बैठक में धमेंद्र प्रधान ने सभी जिलाध्यक्षों और प्रभारियों को 60 सीटों का लक्ष्य दिया है। इसके तहत, सभी नेताओं को अपने-अपने जिलों में धुआंधार प्रचार की जिम्मेदारी भी सौंपी है। साथ ही संबंधित जिलों में विधानसभा क्षेत्रों को लेकर प्रत्याशियों को लेकर भी फीडबैक लिया है। जिलाध्यक्षों की तरफ से यह मामला रखा गया है कि कई सीटों पर एक से अधिक दावेदार हैं और सभी के अपने-अपने तर्क हैं। लंबे मंथन के बाद धमेंद्र प्रधान ने कहा कि हाईकमान के आदेशानुसार, विधानसभा चुनावों में सिफारिश के आधार पर नहीं बल्कि सर्वे के आधार पर टिकटों का आवंटन किया जाएगा। इसलिए चुनावों से पहले भाजपा प्रदेश के सभी 90 विधानसभा क्षेत्रों में सर्वे कराएगी। इसके लिए राज्यस्तरीय सर्वे कमेटी बनेगी। इतना ही नहीं केंद्रीय स्तर पर भी भाजपा अलग से अपना सर्वे कराएगी। राज्य और केंद्र के दोनों सर्वों के मिलान के बाद ही टिकट आवंटित होंगे।
प्रदेश में घट रहे प्रभाव को बढ़ाने की कोशिश
पिछले दो विधानसभा चुनावों की बात करें तो प्रदेश में भाजपा का प्रभाव घट रहा है। 2014 के विधानसभा चुनावों में भाजपा पहली बार 47 सीटों पर जीत के साथ पूर्ण बहुमत से सत्ता में आई थी। इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनावों में सभी दस सीटों पर जीत हासिल करने के बाद भाजपा ने विधानसभा चुनावों में 75 पार का नारा दिया, लेकिन पार्टी 40 सीटों पर ही जीत हासिल कर पाई थी। इस बार भाजपा ने 60 सीटों को जीतने का लक्ष्य रखा है।