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बापूधाम में पुलिस गश्त बढ़ाने के साथ लोगों को जागरूक करना जरूरी: विवेक अत्रे

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चंडीगढ़। बापूधाम में कोरोना की चेन को तोड़ना है तो बाहर फोर्स लगाने के साथ ही कॉलोनी के अंदर चप्पे-चप्पे पर गश्त बढ़ानी होगी, जिससे कॉलोनी के अंदर फिजिकल डिस्टेंसिंग के मानकों का कड़ाई से पालन हो सके। साथ ही तेजी से बढ़ते कोरोना के संक्रमण को रोका जा सके। ये बातें रविवार को पूर्व आईएएस विवेक अत्रे ने अमर उजाला से साझा की।
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विवेक अत्रे पंचकूला के डीसी के साथ ही चंडीगढ़ में भी डीपीआर व आईटी प्रभारी के पद पर रह चुके हैं। पूर्व आईएएस व सुविचार थिंक टैंक समूह के कन्वीनर ने बताया कि बापूधाम में बढ़ती मरीजों की संख्या चिंता का विषय है। वहां त्वरित सुधार के लिए प्रशासन को स्वास्थ्य विभाग व पुलिस के साथ मिलकर कार्य योजना तैयार करनी होगी जिसमें कंटेनमेंट जोन के नियमों का सख्ती से पालन कराने के साथ ही वहां के निवासियों के मानसिक तनाव को कम करने पर फोकस प्लान बनाना होगा। इससे राहत के साथ ही लोगों की जागरूकता के बल पर सकारात्मक परिणाम सामने आ सकेंगे। सुविचार थिंक टैंक में कई वरिष्ठ व रिटायर्ड अधिकारी जुड़े हैं, जो समय-समय पर सरकार को सुझाव देते हैं। सुविचार थिंक टैंक ने हाल ही में केंद्र सरकार को लॉकडाउन खोलने को लेकर भी सुझाव दिए थे।
पुलिस गश्त से मेंटेन होगी फिजिकल डिस्टेंसिंग
पूर्व आईएएस ने बताया कि पंचकूला में जब-जब पॉजिटिव केस आए, तब-तब सेक्टर को सील करने के साथ ही अंदर भी लगातार सख्ती रखी। बापूधाम के बाहर सीआरपीएफ लगी है, लेकिन अंदर लोग आराम से घूम रहे हैं। ऐसे में अंदर पुलिस गश्त जरूरी है ताकि लोगों में थोड़ा डर रहे और वह घरों में रहें। फिजिकल डिस्टेंसिंग मेंटेन करने का यही एक मात्र तरीका है क्योंकि बापूधाम में काफी गलियां हैं। लोग गलियों में बैठकर आसानी से ताश खेल रहे हैं, घूम रहे हैं। इससे संक्रमण का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है। 10 शहर ऐसे हैं जहां 95 प्रतिशत कोरोना के मरीज हैं। राहत की बात यह है कि चंडीगढ़ उनमें शामिल नहीं है। इसलिए अभी वक्त है संभलने का, बस योजना बेहतर बनानी होगी।
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स्वास्थ्य विभाग का विशेषज्ञ तैनात हो, घर-घर जागरूकता जरूरी
विवेक अत्रे ने बताया कि बापूधाम में एक हेल्प डेस्क बनाने की जरूरत है, जहां स्वास्थ्य विशेषज्ञ बैठें। आते-जाते लोगों को सैनिटाइज करें और सावधानियों से संबंधित जानकारी दे सकें। चूंकि वहां श्रमिक वर्ग के लोग काफी हैं, इसलिए स्वास्थ्य कर्मचारियों को पुलिस के साथ लोगों को घर-घर जाकर जागरूक करना होगा। जिन घरों में कोरोना पॉजिटिव मरीज मिले हैं, वहां प्रतिदिन जाकर उनसे बातचीत करनी होगी। साथ ही कोरोना से बचने के लिए आवश्यक सावधानियां रखने के बारे में भी बताना होगा। इसके लिए चित्र वाले पेम्पलेट देना होगा, ताकि लोग कोरोना की गंभीरता को आसानी से समझ सकें।
बढ़ रहा है मानसिक दबाव, काउंसलिंग भी जरूरी
घरों में रहकर लोगों पर मानसिक दबाव बढ़ रहा है। वहीं जिन लोगों के परिजन पॉजिटिव या संदिग्ध होने पर अस्पताल में भर्ती हैं, उन्हें समय से जांच रिपोर्ट न मिलने पर भी मानसिक दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में लोगों की काउंसलिंग जरूरी है। जिनके परिजन हॉस्पिटल में भर्ती हैं उनके घर वालों को प्रतिदिन मरीज की जानकारी के साथ ही उनसे लगातार संवाद बनाया जाए ताकि उनका मानसिक दबाव कम हो सके। हाल ही में चोरी छिपे बापूधाम से 9 लोगों के बाहर भागने की घटना इसका बड़ा उदाहरण है। ऐसी घटना दोबारा न हो इसलिए काउंसलिंग बहुत जरूरी है।
ठीक हो चुके मरीजों से बनवाया जाए मोटिवेशनल वीडियो
कोरोना शब्द सुनते ही लोगों में तनाव बढ़ने लगता है। ऐसे में कोरोना को मात देकर घर जा चुके लोगों का एक मोटिवेशनल वीडियो बनवाया जाए, जिसे सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसारित कराया जाए। ऐसे मोटिवेशनल वीडियो एक ओर कोरोना के खिलाफ लड़ने के लिए लोगों को एकजुट करेंगे, वहीं सावधानियां रखने के लिए भी काफी हद तक सहायक होंगे। वहीं यह वीडियो पॉजिटिव मरीजों के प्रति बनी लोगों की मानसिकता में भी परिवर्तन लाएंगे। इस समय लोगों में सकारात्मकता लाने के लिए उनसे संवाद स्थापित करना बहुत जरूरी है, फिर चाहे वह फेस टू फेस हो या सोशल मीडिया से हो।
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