इसका लाभ मेडिकल के विद्यार्थियों को मिलेगा। अब उन्हें थ्योरी के साथ प्रथम प्रोब से ही अस्पताल में क्लीनिकल शिक्षा मिलेगी। अभी तक प्रथम प्रोब के एमबीबीएस विद्यार्थियों को अस्पताल में मरीजों के बीच नहीं लाया जाता था। जो जानकारी अब विद्यार्थियों को इंटर्नशिप में मिलती है, उसे वह अब नये नियमानुसार शुरू से ही सीखेंगे।
बैठक में पहले 104 एजेंडे रखे गए और बाद में 110 तक टेबल एजेंडा रखा गया। कुलपति कार्यालय में मंगलवार सुबह साढे़ दस बजे से दोपहर एक बजे तक एसी की बैठक हुई। इसमें कुलपति डॉ. ओपी कालरा, निदेशक डॉ. रोहतास कंवर यादव, कुलसचिव डॉ. एचके अग्रवाल, डीन डॉ. सरिता मग्गू व सभी विभागाध्यक्ष उपस्थित रहे।
स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर के लिए डॉक्टरों की योग्यता में मांगी छूट
2019 में संस्थान स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर खोलने जा रहा है, लेकिन सबसे बड़ी संस्थान की समस्या है कि उसे ऑर्थो स्पोर्ट्स इंजरी के एक्सपर्ट ही नहीं मिल रहे हैं। इसलिए संस्थान इसमें छूट देने के लिए अपनी सहमति बना रहा है। इस एजेंडे पर ईसी की स्वीकृति के बाद कुलपति को भेजा जाएगा कि वह स्वास्थ्य मंत्रालय से इसकी योग्यता में छूट लें, जिससे यह सेंटर चलाया जा सके।
- नर्सिंग व फिजियोथेरेपी विभाग के लिए सर्विस रूल बनाया
एमडी दो साल वालों के लिए थिसिस जमा कराने का नियम
- फार्मेसी कॉलेज की फीस तीन से पांच लाख व अलग विषय शुरू करने के लिए दो से तीन लाख की फीस जमा करानी होगी
- पेपर मार्किंग के लिए कम से कम 1000 रुपये और 40 रुपये प्रति पेपर का चार्ज तय
- अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस में शामिल होने के बाद चार साल कार्य करना जरूरी नहीं तो खर्च हुई राशि 18 प्रतिशत ब्याज समेत जमा कराना होगा (नये चिकित्सकों के लिए)
- बीपीटी द्वितीय वर्ष में योगा का जोड़ना
- परीक्षा नियंत्रक पद के लिए बनाए नियम, अब होगी सीधी भर्ती, 15 साल के अनुभव के साथ एमडी व एमएस होना जरूरी
- अकेडमिक अलाउंस 2500 से किया 20 हजार रुपये
- लर्निंग रिसोर्स अलाउंस 20 हजार से किया एक लाख 20 हजार रुपये
- डीएम व एमसीएच करने वालों के लिए स्टडी रूल में संशोधन, पांच साल नौकरी के बाद ही जा सकते हैं स्टडी लीव पर। कोर्स पूरा करने के बाद सात साल पहले संस्थान छोड़ने पर सैलरी का डबल संस्थान को कराना होगा जमा।