पीजीआई के ओपीडी कार्ड में मरीजों के नाम पर होने वाली गलतियों को रोकने के लिए प्री रजिस्ट्रेशन की नई प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके तहत मुख्य काउंटर में कार्ड बनाने से पहले मरीजों को एक फॉर्म थमाया जा रहा है। फॉर्म में मरीज को अपना नाम, उम्र, पिता का नाम, हाउस नंबर, शहर का नाम और मोबाइल नंबर भरना होगा।
मरीज ने फॉर्म में जो नाम व एड्रेस लिखा होगा, काउंटर पर बैठे कर्मी को उसे मुख्य कार्ड में भरना होगा। ताकि रजिस्ट्रेशन के दौरान मरीज के नाम और उसके पते में गलती की गुंजाइश न हो। हालांकि नई प्रक्रिया से कुछ मरीजों को दिक्कतें भी आ रही हैं। बताया जा रहा है कि यह फिलहाल ट्रायल के तौर पर एक दो काउंटर में शुरू किया गया है।
इसलिए लिया फैसला
ओपीडी में रजिस्ट्रेशन के दौरान नाम और पते में अक्सर गलतियों की शिकायत रहती है। कई बार मरीज अपने नाम के अक्षर बताने में गलती कर बैठते हैं तो कभी रजिस्ट्रेशन काउंटर में बैठे कर्मी। इसका खामियाजा सीधे तौर पर मरीज को भुगतना पड़ता था। यह परेशानी उस समय और बढ़ जाती थी, जब मरीज को किसी बिल का रिफंड लेना हो या फिर कोई सर्टिफिकेट बनाना हो। गलती सुधारने के लिए मरीज काफी मशक्कत करनी पड़ती थी। एप्लीकेशन लेकर विभागों के चक्कर काटने पड़ते थे। इस समस्या से निजात पाने के लिए प्री रजिस्ट्रेशन की सुविधा रखी गई है।
मरीजों को कुछ परेशानी भी आ रही हैं
नई प्रक्रिया से मरीजों को कुछ परेशानी भी आ रही है। खासकर उन मरीजों को, जो पढ़े-लिखे नहीं हैं। पीजीआई में इस कैटेगिरी में आने वाले मरीजों की संख्या भी ज्यादा है। जब उन्हें फॉर्म दिया जाता है तो वे उसे भर नहीं पाते। ये मरीज लाइन से निकल कर उन व्यक्तियों की तलाश करते हैं, जो उनके फॉर्म भर सकें। जब तक उनका फॉर्म नहीं भरता तब तक रजिस्ट्रेशन भी नहीं होता। ऐसे में उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
कोट
यह सुविधा इसीलिए शुरू की गई है, ताकि मरीजों के ओपीडी कार्ड में कोई दिक्कत न आए। जो मरीज फॉर्म नहीं भर पाते हैं, उन्हें प्री रजिस्ट्रेशन फॉर्म नहीं दिया जाता है।
मंजू वडवालकर, प्रवक्ता पीजीआई।