याची ने कहा कि ऐसा करना पूरी तरह से गलत है, क्योंकि इस नियम के तहत वह आवेदक भी इस कोटे के तहत दाखिला ले लेंगे, जिन्होंने अन्य किसी भी राज्य से गयारवीं तक शिक्षा ली है और बाहरवीं चंडीगढ़ में आकर कर ली है। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि इस नियम से शहर के छात्रों को बाहरी राज्यों के आवेदकों से मुकाबला करना पड़ेगा, जोकि पूरी तरह से गलत है।
इस नियम के चलते स्टेट कोटा का कोई मतलब ही नहीं रह जाएगा। हाईकोर्ट को बताया गया कि वर्ष 1992 -93 में जब जीएमसीएच बना था तब शहर के स्कूल से दसवीं, ग्यारवीं और बाहरवीं करने वाले आवेदकों को ही स्टेट कोटे में दाखिला दिया जाता था। बाद में इस नियम में ढील देते हुए इसमें सिर्फ ग्यारवीं और बाहरवीं कर दिया गया इसके बाद सिर्फ बाहरवीं का ही प्रावधान बना दिया गया।
गत वर्ष भी प्रशासन ने यही नियम बनाये थे, तब हाईकोर्ट ने प्रशासन के इस नियम को रद्द करते हुए उसे स्टेट कोटे के नियम और बेहतर बनाये जाने के आदेश दिए थे। इन आदेश के बावजूद प्रशासन ने फिर वही पुराना नियम लागू कर दिया जिसे दोबारा हाईकोर्ट में चुनौती दे दी गई।