पंजाब व हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ में अवैध वेडरों का कब्जा है। शहर में वेंडरों की स्थिति पर सुप्रीम कोर्ट ने नगर निगम कमिश्नर को दो हफ्ते के भीतर जवाब देने के लिए कहा है। कोर्ट ने हलफनामे में स्पष्ट करने को कहा है कि शहर में वेंडर जोन कितने हैं, कितने लाइसेंस जारी किए गए और अवैध वेंडरों पर क्या कार्रवाई की गई।
सेक्टर-8, 7 और 26 में भी चाय, पान, परांठा की अवैध दुकानें
सेक्टर-8, 7 और 26 मध्यमार्ग पर कई होटल, रेस्टोरेंट और टाइल्स व बैंकों के आगे अवैध वेंडर बैठे हुए हैं। इनमें से कई अवैध वेंडरों को तो दुकानदारों ने ही बैठा रखा है। शोरूम के आगे जगह देकर इनसे पांच से 10 हजार रुपये महीना किराया वसूला जा रहा है। इन्फोर्समेंट विंग महीने-डेढ़ महीने में एक बार चक्कर लगाकर छोटा-मोटा सामान जब्त कर और एक से दो हजार रुपये का चालान कर इन अवैध वेंडरों को भूल जाता है। सेक्टर-8 में रिंकू नाम का युवक राजमा-चावल की रेहड़ी लगाता है। सेक्टर-7 में ओवरसीज बैंक के पास एक वेंडर बैठा है। इसी शोरूमों के आगे पब्लिक के चलने वाले कॉरिडोर में भी अवैध कब्जे हो रखे हैं।
पूर्व कर्मचारी ने इन्फोर्समेंट विंग में वसूली को लेकर किया था खुलासा
इन्फोर्समेंट विंग के पूर्व कर्मचारी विकास का बीते अगस्त में एक वीडियो सामने आया था। वीडियो में उसने वसूली के आरोप लगाए थे। विकास ने कहा था कि दो-तीन को छोड़कर सभी इंस्पेक्टर हर महीने वेंडरों से लाखों रुपये कमा रहे हैं। उसने यहां तक कहा था कि वह पिछले ढाई साल से एक इंस्पेक्टर के लिए पैसे इकट्ठा करता था, अब और ज्यादा वसूली का दबाव बनाया जा रहा था। मना करने पर उसे नौकरी से निकाल दिया गया। वीडियो में विकास ने कहा था कि जिन वेंडरों के पास लाइसेंस नहीं है उनसे 2000-3000 रुपये लिए जाते हैं। वो खुद कई लाख रुपये इकट्ठा कर एक इंस्पेक्टर देता था।
क्या कहते हैं अधिकारी
नगर निगम का इन्फोर्समेंट विंग लगातार अवैध वेंडरों पर कार्रवाई कर रहा है। जिन वेंडरों को लाइसेंस मिले हैं उनकी भी चेकिंग कराई जा रही है कि वह अतिक्रमण को तो कहीं बढ़ावा नहीं दे रहे हैं। वेंडरों वाले मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जो ऑर्डर किये हैं, वह अभी नहीं मिले हैं। ऑर्डर में जो भी कहा गया होगा उस पर नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। -अमित कुमार, आयुक्त, नगर निगम