हरियाणा में यमुना नदी और अरावली की पहाड़ियां दो ऐसे क्षेत्र हैं, जहां अवैध खनन की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। इसी के मद्देनजर अब सरकार ने यमुना और अरावली एरिया में अवैध खनन पर और शिकंजा कसने की तैयारी की है। इसके लिए अब पहली बार दो अलग-अलग एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) गठित की जाएगी। एक एसटीएफ यमुना नदी और दूसरी एसटीएफ अरावली हिल्स पर अवैध खनन करने वालों की धरपकड़ करेगी। इतना ही नहीं सरकार ने पहली बार इस विभाग के महानिदेशक की कमान भी आईजी स्तर के अनुभवी आईपीएस अधिकारी को सौंपी है।
आईपीएस अफसर अमिताभ ढिल्लों को हरियाणा खनन एवं भूविज्ञान विभाग का डायरेक्टर जनरल (डीजी) बनाया गया है। अभी तक विभाग का डीजी आईएएस अफसर को बनाया जाता था। ये एसटीएफ हरियाणा खनन एवं भूविज्ञान विभाग के अधीनस्थ ही काम करेगी और इसकी रिपोर्टिंग भी डीजी अमिताभ ढिल्लों को रहेगी। सूत्रों ने बताया कि प्रदेश में अवैध खनन की शिकायतों पर कड़ी कार्रवाई करने के लिए सरकार इस महकमे को अब एक पुलिसिया अंदाज में चलाना चाहती है। जिसकी शुरूआत उक्त व्यवस्था से की गई है।
दरअसल, हरियाणा में यमुना नदी और अरावली की पहाड़ियां कई जिलों से होकर गुजरती है। यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, करनाल, पानीपत व सोनीपत इन इलाकों से होकर यमुना नदी दिल्ली में प्रवेश करती है। जबकि दिल्ली से होकर अरावली की पहाड़ियां दक्षिणी हरियाणा के जिलों से होती हुई राजस्थान को बढ़ती हैं। यमुना नदी से रेत और बालू व अरावली की पहाड़ियों से पत्थर के अवैध खनन की शिकायतें विभाग के पास लगातार पहुंचती है। यहां छोटे-बड़े खनन माफिया मिलीभगत के चलते सक्रिय हैं।
समय-समय पर इन शिकायतों पर संबंधित जिलों के माइनिंग अफसरों द्वारा कार्रवाई की जाती है, लेकिन अवैध खनन करने वालों के हौसले इतने बुलंद रहते हैं कि कार्रवाई केबावजूद वे अपना ‘खेल’ बंद नहीं करते। कई बार तो अवैध खनन का विरोध करने वालो ग्रामीणों व अन्य लोगों तक पर ये माफिया हमला तक बोल देता है।