खाली प्लॉटों पर विकास शुल्क 10 से घटाकर किया 8 प्रतिशत
अवैध कॉलोनियों के निवासियों को राहत देते हुए सरकार ने खाली प्लॉटों पर विकास शुल्क 10 से घटाकर 8 प्रतिशत कर दिया है। साथ ही बने हुए मकानों पर विकास शुल्क पांच प्रतिशत रहेगा। यह शुल्क संबंधित क्षेत्र कृषि योग्य भूमि के कलेक्टर रेट पर देय होंगे। वाणिज्यिक घटक के लिए तीन गुना होंगी। इसके अलावा, इन कालोनियों में औद्योगिक इकाई, गोदाम, मॉल, मल्टीप्लेक्स, होटल और बैंक्वेट हॉल आदि के भूखंडों को लेआउट प्लान में ठीक से दिखाया जाएगा और इनको छूट से बाहर रखा जाएगा।
ये भी मिली छूट
पहले वैधता के लिए आवेदन करने के लिए शर्त थी कि कॉलोनी में बिके हुए प्लॉटों की रजिस्ट्री होनी चाहिए लेकिन अब सरकार ने राहत दी है कि या तो सेल डीड हो या फिर एक जुलाई 2022 से पहले का रजिस्ट्रड एग्रीमेंट वह भी मान्य होगा। इसके अलावा, पहले ए और बी श्रेणी की कॉलोनियों के लिए शर्त थी कि उनकी अप्रोच रोड 6 मीटर की हो और अंतर की सड़कें 3 मीटर तक हों लेकिन अब सी श्रेणी की कालोनियों के लिए 6 मीटर की शर्त को हटा लिया है। वहीं, पहले कालोनी में 500 मीटर क्षेत्र में पार्क जरूरी था लेकिन अब कालोनाइजर का प्लॉट खाली है और बिना बिका हुआ है तो उसमें पार्क बनाया जा सकता है।
30 सितंबर तक वैध की जानी है कॉलोनियां
मुख्यमंत्री घोषणा कर चुके हैं कि अवैध कॉलोनियों को 30 सितंबर तक वैध किया जाएगा। प्रदेश में करीब 3500 से अधिक अवैध कॉलोनियां हैं। इनमें से 1400 से अधिक कॉलोनियों को वैध करने के लिए प्रस्ताव शहरी निकायों ने पास कर दिया है। इनमें से 740 कॉलोनियां नियमों पर खरी मिलीं। इनमें से पिछले माह ही मुख्यमंत्री ने निकाय क्षेत्र के अंदर आने वाली 190 कालोनियों को वैध करने को मंजूरी दी थी। शेष कॉलोनियों को भी वैध करने का काम चल रहा है।