फिल्मी गीतों और पंजाबी एलबमों में पीजी संचालक महिलाओं की छवि को काफी नकारात्मक तरीके से पेश किया जा रहा है। उन्हें पीजी में रहने वाले युवक-युवतियों को परेशान करने वाला और उन पर रौब झाड़ने वाला बताया जाता है।
‘आंटी पुलिस बुला लेगी’ और ‘पीजी वाली आंटी ने वी छित्तर मारे कड्ड के’ जैसे गीत इसका उदाहरण भर हैं। दूसरी ओर पीजी चलाने वाली महिलाओं का कहना है कि हम बच्चों को परेशान नहीं करते बल्कि वे इरिटेट करते हैं। जब कमरा लेना होता है तो बड़े शरीफ से बनकर आते हैं और बाद में उनकी शैतानियां सामने आती हैं।
चंडीगढ़ में हर साल बड़ी संख्या में पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों से आकर छात्र पढ़ाई करते हैं। इनमें सभी को हॉस्टल में जगह नहीं मिलती और काफी पीजी रहते हैं। इस संबंध में सेक्टर-15और 22 में कुछ पीजी संचालिकाओं से बात की गई तो उनकी दिक्कतें सामने आईं।
बिगड़ जाते हैं दो महीने में
सेक्टर-15 में भूपिंदर कौर लड़कों को पीजी रखती हैं। पीजी के लिए सबसे उनकी दो शर्तें होती हैं, एक तो लाउड म्यूजिक नहीं चलेगा और कोई नशेबाजी नहीं होनी चाहिए।
पहले सब हामी भरते हैं मगर दो महीने के अंदर ही पता नहीं इन्हें क्या हो जाता है। दुनिया भर के ऐब लिए घूमते हैं। एक बार तो एक लड़के को रातोंरात घर से निकालना पड़ा। कुछ ऐसे भी आते हैं, जो कमरे को ताला लगाकर गायब हो जाते हैं।
जरूरत पड़ने पर हम करते हैं मदद
सेक्टर 22 में नीलम मखेजा लड़के और लड़कियों दोनों के लिए पीजी चलाती हैं। मखेजा के अनुसार आजकल का यूथ काफी एडवांस है और उसका लाइफस्टाइल काफी बदल गया है।
हम तो बस एक ही शर्त लगाते हैं कि किसी भी सूरत में यहां की शांति भंग न हो। बाकी अपनी जिंदगी जैसे मरजी जिएं। अगर कोई महिला मित्र के साथ रहना चाहता है तो सिर्फ दो लोग रह सकते हैं।
हम जरूरत पड़ने पर इनका ख्याल रखते हैं और कई बार तबीयत बिगड़ने पर लड़कों को अस्पताल में भर्ती कराया है। गाने हमारी इमेज खराब कर रहे हैं।
आजादी का गलत फायदा
सेक्टर-15 की सोनिका भी लड़के और लड़कियों को पीजी रखती हैं। उनकी शिकायत है कि लड़के को पीजी रखो तो लड़कियां घर आने लगती हैं और लड़की को रखो तो लड़के आने लगते हैं।
इतनी छोटी उम्र में इन्हें ये सब करते देखकर बड़ी तकलीफ होती है। इन की हरकतों से कई बार लोग पीजी रखना छोड़ देते हैं। इससे उन बच्चों को भी तकलीफ होती है जिन्हें कमरों की तलाश होती है।