चंडीगढ़। डायबिटिक फुट से बचाव में शारीरिक गतिविधि महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह वजन कम करने में मदद करती है। व्यायाम डायबिटीज के विकास के जोखिम को लगभग 60 फीसदी तक कम करने में मदद करता है। ब्लड शुगर के स्तर पर नजर रखना सुनिश्चित करें। विटामिन, खनिज और कार्बोहाइड्रेट सहित संतुलित आहार लें। नंगे पैर न चलें और सैंडल न पहनें। क्योंकि इससे पैर कंक्रीट या रेत के संपर्क में आ सकते हैं, इससे पैर में खरोंच या जलन हो सकती है। जो डायबिटिक फुट का कारण बन सकते हैं। इसलिए पैरों को हमेशा कवर्ड रखें ताकि कोई घाव न हो। यह जानकारी वस्कुलर सोसाइटी फॉर लिंब सेल्वेज के अध्यक्ष डॉ. रावुल जिंदल ने रविवार को टैगोर थियेटर में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में दी। डॉ. रावुल ने बताया कि यह त्वचा या पैर के नाखूनों में परिवर्तन, कट, छाले, घाव, तरल पदार्थ या मवाद का स्राव, दुर्गंध, दर्द, रेडनेस, त्वचा का रंग बदलना, सूजन आदि का कारण बनता है। इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन के मुताबिक पिछले साल देश में डायबिटीज ऐम्प्यटैशन के एक लाख से ज्यादा मामले सामने आए थे। डॉ. रावुल जिंदल ने कहा कि डायबिटीज स्ट्रोक, दिल का दौरा, किडनी फेल का एक प्रमुख कारण है। यह बीमारी मुख्य रूप से उन लोगों को प्रभावित करती है जिन्हें 10 साल से अधिक समय से शुगर है। इस अवसर पर मेयर अनुप गुप्ता, वरिष्ठ भाजपा नेता संजय टंडन, स्वास्थ्य निदेशक डॉ. सुमन सिंह, आईएमए पंचकुला के अध्यक्ष डॉ. सुनील मल्होत्रा, आईएमए चंडीगढ़ के अध्यक्ष डॉ. गुरविंदर सिंह, आईएमए चंडीगढ़ के सचिव डॉ. विवेक मल्होत्रा, आईएमए मोहाली के अध्यक्ष डॉ. संजीत सिंह सोढ़ी , मार्कफेड के एचएस बैंस, चंडीगढ़ रोटरी के उपाध्यक्ष सरताज लांबा, पंजाब के विशेष डीजीपी संजीव कालरा, मोहाली के लायंस क्लब के अध्यक्ष अमनदीप, रयात बाहरा के निदेशक जीएस बाहरा, सीनियर सिटीजन एसोसिएशन ऑफ मोहाली से हरिंदर पाल सिंह उपस्थित थे।