मोहाली। अब मोहाली और चंडीगढ़ की पुलिस को चकमा देने वाले अपराधियों की खैर नहीं। चंडीगढ़ और मोहाली पुलिस ने अब हाथ मिला लिए हैं। मोहाली पुलिस और चंडीगढ़ पुलिस की टीमें अपराधियों पर नकेल कसने के लिए सीमाओं के बंधन छोड़ एक दूसरे के साथ मिलकर ज्वाइंट आपरेशन को तैयार हो चुकी हैं। इस संबंध में एक मीटिंग सोहाना डीएसपी 2 के कार्यालय में हुई। जिसमें मोहाली और चंडीगढ़ एरिया के छह एसएचओ और डीएसपी ने भाग लिया। मूलरूप से इस एक्शन की शुरुआत लोकसभा चुनावों के मद्देनजर की जा रही है। जिससे कि चुनावों को शांतिपूर्ण करवाया जा सके और चुनाव के दौरान कोई भी आपराधिक गतिविधियां न हो सकें।
इस बारे में डीएसपी 2 मोहाली हरसिमरन सिंह बल ने बताया कि कई मामलों में देखा गया है कि अपराधी चंडीगढ़ से निकलकर मोहाली में आ जाता है और जानकारी के अभाव में उसे पकड़ नहीं पाते। इतना ही नहीं, कई बार ऐसा होता है कि मोहाली में कोई अपराधी अपराध में प्रयोग किए गए वाहनों को छोड़ जाता है और मोहाली पुलिस को इसकी जानकारी न होने की वजह से यह लावारिस हो जाता है। अब ऐसी स्थिति नहीं रहेगी।
हरसिमरन बल ने बताया कि चंडीगढ़ और मोहाली की सीमाओं के पास की पुलिस ने तय किया है कि एकसाथ मिलकर नाका भी लगाया जाएगा और सीमा में होने वाली आपराधिक वारदात को साझा भी किया जाएगा। इसके लिए बाकायदा एक सिस्टम डेवलप किया जाएगा। जिससे कि मोहाली पुलिस मोहाली में होने वाली वारदात की जानकारी चंडीगढ़ को दे, जिससे चंडीगढ़ की टीम चौकन्नी हो सके और चंडीगढ़ की पुलिस घटनाक्रम की जानकारी मोहाली को दे, जिससे कि मोहाली बार्डर एरिया की पुलिस भी एक्शन में आ सके। इस मीटिंग में डीएसपी साउथ दलबीर सिंह भिंडर, एसएचओ जसबीर सिंह और एसएचओ रामरतन भी मौजूद थे।
चंडीगढ़ और मोहाली के खास इलाके
चंडीगढ़ और मोहाली से जुड़े खास इलाकों की बात करें तो इसमें सेक्टर-31, सेक्टर-47, सेक्टर-45, सेक्टर-42, सेक्टर-40, सेक्टर-39, सेक्टर-41 हैं। जिसमें एक ओर चंडीगढ़ की सीमा खत्म होती है और दूसरी ओर मोहाली की सीमा। बुड़ैल जेल और सेक्टर-51 भी मोहाली के साथ जुड़े हुए एरिया हैं। जहां आपराधिक गतिविधि के बाद सीमाओं का लाभ लेकर अपराधी आसानी से निकल जाता है।
गैंगस्टर भी उठाते हैं इसका लाभ
मोहाली और चंडीगढ़ से सटा होने का लाभ गैंगस्टर भी उठाते हैं। चाहे वह जीरकपुर का एरिया हो या फिर पीरमुछल्ला और डेराबस्सी का। वारदात के बाद अपराधी मोहाली में पनाह लेते हैं और चंडीगढ़ और पंचकूला में वारदात करके गायब हो जाते हैं। पुलिस का कोआर्डिनेशन न होने का लाभ इन गैंगस्टरों को मिलता है।