चंडीगढ़। शहर में ज्यादातर लोग कुत्ते पालने का शौक रखते हैं। हर कोई व्यक्ति यही सोचता होगा कि अगर उनका कुत्ता गंभीर रूप से बीमार पड़ जाए तो उन्हें बाहर नहीं जाना पड़ेगा, घर के पास ही किसी सरकारी अस्पताल में उसका इलाज हो जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं है। शहर में अगर किसी का कुत्ता गंभीर रूप से बीमार हो जाए और सर्जरी आदि की जरूरत पड़े तो उसे लुधियाना स्थित गुरु अंगद देव वेटरनरी एनिमल साइंस यूनिवर्सिटी में भेजा जाता है। सेक्टर-22 के पैट अस्पताल में कुत्तों के इलाज के लिए डॉक्टरों की कमी है। इतना ही नहीं शहर के किसी भी वेटरनरी अस्पताल में पशुओं के बीमार होने पर उन्हें अच्छी सुविधाएं नहीं मिल पा रहीं। शहर का सबसे बड़े पेट अस्पताल में कुत्ते के बीमार होने पर उसकी बीमारी का पता लगाने के लिए सिर्फ एक ही डॉक्टर है। धनास के रहने वाले राजेश कुमार ने बताया कि कुछ दिनों पहले उनका कुत्ता बीमार हो गया था, जिसके बाद वह उसे सेक्टर-22 सी स्थित पेट अस्पताल में लेकर गए। डॉक्टरों के दिखने पर उसकी बीमारी का पता नहीं चल पाया। डॉक्टर ने कुत्ते को लुधियाना के अस्पताल में रेफर कर दिया। उन्होंने बताया कि चंडीगढ़ जैसे शहर में हर सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। शहर के पेट अस्पतालों में न तो दवाइयां हैं और न ही इलाज करने के उपकरण। लुधियाना जाने में खर्च भी बहुत आता है। कुत्ते को बसों में भी नहीं ले जा सकते ऐसे में उन्हें ले जाने के लिए अलग से टैक्सी करनी पड़ती है, जिसका खर्च बहुत ज्यादा आता है। उन्होंने कहा कि शहर में कुत्तों के बीमार पड़ने पर अच्छी सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए।
जो भी कमिया हैं उन्हें देखा जाएगा। पेट अस्पतालों में जो भी कमियां आ रही हैं उन्हें जल्द पूरा किया जाएगा।
-विनोद पी कावले, निदेशक, पशुपालन विभाग