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Chandigarh News: एचआईवी संक्रमित का निडिल पिक हो जाए तो 72 घंटे के अंदर लें दवा, रहेंगे सुरक्षित

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चंडीगढ़। एचआईवी संक्रमित को अन्य बीमारियां भी हो सकती है। एचआईवी संक्रमित का इलाज करते समय डॉक्टर के साथ पैरामेडिकल स्टाफ को भी अपनी सुरक्षा के प्रति सजग रहने की जरूरत होती है इसलिए बचाव के मानक का पालन करना बहुत जरूरी होता है। यह जानकारी सभी को होनी चाहिए। अगर एचआईवी संक्रमित का इलाज करते वक्त निडिल पिक इंजरी या ऐसी दूसरी असावधानी हो जाए तो 72 घंटे के अंदर दवा खाकर इसके संक्रमण से बचा जा सकता है। ये बातें पीजीआई एआरटी सेंटर के परियोजना निदेशक प्रो. अमन शर्मा ने वीरवार को एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर में एचआईवी अपडेट 2024 पर आयोजित सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम में कहीं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पीजीआई के उप डीन (अनुसंधान) प्रो. आरके राठौर थे। वहीं, बतौर विशिष्ट अतिथि प्रो. संजय जैन व पीजीआई के पूर्व डीन प्रो. सुभाष वर्मा मौजूद रहे।
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प्रो. अमन शर्मा ने बताया कि एचआईवी संक्रमित मरीजों का इलाज करते वक्त अस्पताल में निडिल पिक इंजरी (मरीज पर उपयोग की गई सुई गलती से खुद को चुभ जाना) का खतरा रहता है। ऐसा होने पर उस डॉक्टर या पैरामेडिकल स्टाफ को एचआईवी संक्रमित मरीजों को दी जाने वाली दवा 72 घंटे के अंदर दे दी जाती है। यह दवा चार हफ्ते तक लेनी होती है। उसके बाद हर महीने जांच की जाती है। फिर 3 महीने और 6 महीने पर जांच के दौरान रिपोर्ट निगेटिव आने पर सुरक्षित मान लिया जाता है लेकिन इसकी जानकारी अब भी कई लोगों को नहीं है। इसमें जरा सी लापरवाही से लोग एचआईवी संक्रमण का शिकार हो रहे हैं। सरकारी अस्पतालों के साथ निजी अस्पतालों में भी इमरजेंसी जैसी स्थिति में बचाव के लिए ये दवाइयां रखी जा रही हैं।
जांच से लेकर इलाज तक की दी जानकारी

एआरटी केंद्र की एसएमओ डॉ. रविंद्र कौर ने मरीजों के फॉलोअप के साथ माता-पिता से बच्चों में संक्रमण की रोकथाम संबंधी जानकारी दी। प्रो. दीप्ति सूरी ने एचआईवी संक्रमित बच्चों के इलाज के बारे में विस्तार से बताया। वहीं, हिस्टोपैथोलॉजी विभाग के डॉ. महेंद्र ने जांच की रणनीतियों से जुड़ी जानकारी साझा की। कार्यक्रम में पीजीआई के साथ जीएमसीएच 32 और एम्स मोहाली के रेजिडेंट डॉक्टर, स्त्री रोग विशेषज्ञ, फिजिशियन, सर्जन और पैरामेडिकल स्टाफ ने हिस्सा लिया। इस दौरान उन्हें नेशनल एड्स कंट्रोल आर्गेनाइजेशन की गाइडलाइन से जुड़ी जानकारी दी गई। इसमें एचआईवी जांच की अत्याधुनिक तकनीक व इलाज संबंधी थेरेपी में आए बदलाव से जुड़ी जानकारी भी दी गई। कार्यक्रम में पीजीआई एआरटी सेंटर के एसोसिएट प्रोग्राम डायरेक्टर डॉ. शंकर नायडू ने एचआईवी एड्स से संबंधित जानकारी दी। वहीं, प्रो. अमन शर्मा ने कहा कि भारत सरकार के प्रोत्साहन से अब यह कार्यक्रम प्रतिवर्ष विश्व एड्स दिवस पर किया जाएगा ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक सही जानकारी पहुंचाई जा सके।
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एचआईवी एक्ट की भी दी जानकारी

एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर में एचआईवी अपडेट 2024 पर आयोजित सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम में पहुंचे चंडीगढ़ न्यायिक अकादमी के निदेशक डॉ. बलराम गुप्ता ने लोगों को एचआईवी और एड्स अधिनियम 2017 के विभिन्न प्रावधानों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
ये मौजूद रहे
इस अवसर पर एम्स मोहाली की निदेशक प्रिंसिपल प्रो. भवनीत भारती, पीजीआई स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की प्रमुख डॉ. वनिता जैन, एम्स मोहाली की प्रो. सुष्मिता शर्मा, पीजीआई के प्रो. अरुण बंसल, प्रो. नवनीत शर्मा, प्रो. आशीष भल्ला, प्रो. संजय डिक्रूज, प्रो. एसएस लेहल और प्रो. सुनील अरोड़ा भी मौजूद रहे।
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