चंडीगढ़। शहर में कर्फ्यू लगे एक हफ्ता बीत चुका है। प्रशासन ने शहर में अनिवार्य चीजों के खुलने की समय सीमा तय की है, लेकिन प्रशासन इसका ख्याल करना भूल गया कि वाहनों के टायर पंक्चर हो गए या कोई तकनीकी खराबी आ गई तो गाड़ी आगे कैसे बढ़ेगी। शहरवासी भले घर में कैद हैं, लेकिन आवश्यक सेवाओं में लगी गाड़ियों के पहिये चल रहे हैं और अगर वह थम गए तो इन सेवाओं की पूर्ति कैसे होगी।
यूटी प्रशासन ने जिन चीजों को आवश्यक सेवा में शामिल किया है, केवल वही दुकानें खुल रही हैं। इसमें सबसे ऊपर केमिस्ट, पुलिस प्रशासन, खाद्य पदार्थों की दुकानें, पेट्रोल पंप, राशन, अनाज, मीडिया समेत कुछ अन्य सेवाएं शामिल हैं, लेकिन यह सभी सेवाएं जिस पहिये के दम पर दौड़ लगा रही हैं, उसकी ओर किसी का भी ध्यान नहीं गया।
जारी आदेशों में मैकेनिक, पंक्चर लगाने वाले समेत अन्य तकनीकी सेवाएं आवश्यक सेवाओं में शामिल नहीं की गई हैं। शहर के कुछ पेट्रोल पंपों पर हवा भरने की सुविधा है,लेकिन वहां पर पंक्चर बनाने वाले मैकेनिकों को हटा दिया गया है। ऐसे में अनिवार्य सेवाओं में लगे लोगों की शिकायत है कि अगर वाहन खराब हो जाता है तो उसके लिए कोई विकल्प मौजूद नहीं है। ऐसे में मैकेनिक, पंक्चर समेत अन्य जरूरी चीजों को भी आवश्यक सेवा में शामिल करना होगा ताकि किसी के भी सामने यह समस्या ही खड़ी ना हो सके। इस संबंध में कई अधिकारियों को फोन और मैसेज से जानकारी लेने का प्रयास किया गया, लेकिन न किसी ने फोन उठाया और न मैसेज का जवाब दिया।
सामान डिलीवरी करने वाले वाहन चालक हो रहे परेशान
शहर की सभी पंक्चर और मैकेनिक की दुकानें बद हैं। इससे यह रोजमर्रा की सामग्री के आयात-निर्यात में लगे वाहनों और स्वास्थ्य सेवा देने वाली एंबुलेंस आदि की परेशानी बढ़ गई है। इन वाहनों के पंक्चर होने या हवा में कमी आने पर भटकना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशान सामान डिलीवरी करने वाले गाड़ी चालकों को आ रही है। आवश्यक सेवाओं में शामिल रसोई गैस डिलीवरी करने वाली कुछ गाड़ियों में पंक्चर की शिकायत भी आ चुकी है।
कोट..
डीसी मनदीप सिंह बराड़ इस मामले में जल्द कोई फैसला लेंगे। हालांकि, यह जरूरी चीजें हैं, इसलिए इसे अनुमति दी जा सकती है। -मनोज परिदा, एडवाइजर