चंडीगढ़। कश्मीर से कन्याकुमारी तक पूरा भारत एक है और इस अवधारणा को मूर्त रूप देने का श्रेय जाता है सरदार वल्लभ भाई पटेल को। पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित ने मंगलवार को राजभवन के सभागार में यह बात कही। उन्होंने कहा कि नेहरू सरकार में उनकी पूरी तरह नहीं चली। अगर उन्हें खुला हाथ दिया जाता तो आज पीओके भारत में होता। पुरोहित ने पटेल को उनकी जयंती पर याद किया। मौका था एक भारत, श्रेष्ठ भारत की थीम के तहत राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करते हुए केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के स्थापना दिवस का। इसमें बनवारीलाल पुरोहित बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। पंजाब राजभवन में यह दिवस बड़े उत्साह के साथ मनाया गया।इस समारोह का आयोजन पंजाब राजभवन और चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इस अवसर पर बनवारीलाल पुरोहित ने देश के विविधता से भरे सांस्कृतिक ताने-बाने को पहचानने और इसका जश्न मनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ कार्यक्रम के तहत विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्थापना दिवस मनाए जाते हैं। इसका उद्देश्य देश के लोगों के बीच एक मजबूत बंधन और संबंध स्थापित करना है और यह भावना जनता के बीच भी आनी चाहिए। यह आपसी मेलजोल और सामंजस्य को बढ़ावा देता है और ‘वन नेशन वन पीपल’ के बंधन को मजबूत करता है। इस कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सभी से एकजुट होकर एक नए और मजबूत राष्ट्र के निर्माण का संकल्प लेने की भी अपील की।
भला सपाहिया डोगरेया और धोबन... की प्रस्तुति से मचाया धमाल
समारोह की शुरुआत एक मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ हुई, जिसमें मंत्रमुग्ध कर देने वाले मधुर लद्दाखी लोक संगीत और जाब्रो जैसे लोक नृत्य की प्रस्तुतियों के माध्यम से लद्दाख की समृद्ध विरासत को प्रदर्शित किया गया। जम्मू से आई सांस्कृतिक मंडली से ओपी शर्मा ने भला सपाहिया डोगरेया...धोबन और कालेया कांवा वे देया स्नेहा... जैसे एक से बढ़कर एक गीत पेश कर वाहवाही लूटी। मंच संचालिका सिम्मी सिंह ने भी एक डोगरी गीत प्रस्तुत किया, जिसकी राज्यपाल ने सराहना की। इस अवसर पर उपस्थित प्रमुख लोगों में भारत के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सत्यपाल जैन, प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल, डीजीपी चंडीगढ़ प्रवीर रंजन और पूर्व डीजीपी पंजाब पीसी डोगरा आदि मौजूद रहे।
सचिव का नाम लेना भूले तो बोले गलती हो गई
कार्यक्रम में संबोधन के दौरान राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित अपने सचिव का नाम लेना भूल गए तो उन्होंने अंत में चुटकी लेते हुए कहा कि प्रोटोकोल के हिसाब से सेक्रेटरी साहब का नाम पहले आना था। हमसे गलती हो गई। आखिर हमें भी तो ध्यान रखना चाहिए। इस पर सभागार में मौजूद लोग राज्यपाल की सहजता के कायल हो गए।