चंडीगढ़। मेयर चुनाव टलने के बाद डीसी विनय प्रताप सिंह ने छह फरवरी को चुनाव कराने की घोषणा की है। चुनाव छह फरवरी को हुआ तो अनूप गुप्ता सबसे लंबी अवधि के मेयर बन जाएंगे। वर्तमान में उनका कार्यकाल एक साल तीन दिन का हो चुका है जो छह फरवरी तक एक साल 19 दिन का हो जाएगा। इससे पहले सिर्फ देवेश मोदगिल और सरबजीत कौर ही एक साल 8 दिन मेयर रहे हैं।नियमों के अनुसार, जब तक नए मेयर के लिए चुनाव नहीं होंगे, तब तक अनूप गुप्ता ही मेयर ही कुर्सी पर बैठे रहेंगे। नगर निगम के गठन के शुरुआती कई वर्षों तक मेयर का कार्यकाल पूरे एक साल का ही होता था। 23 दिसंबर को चुनाव हो जाते थे और अगले साल 22 दिसंबर को कार्यकाल खत्म हो जाता था लेकिन राजनीतिक कारणों की वजह से वर्ष 2014 के बाद से मेयर चुनाव की तिथियों में बदलाव किया जाने लगा। चुनाव एक निर्धारित तिथि पर न कराकर अपनी सहूलियत के अनुसार कराया जाने लगा। यही कारण है कि वर्ष 2015 के बाद कभी मेयर चुनाव 6 जनवरी तो कभी 8, 9, 10, 17 और 19 जनवरी हो हुए। इस बार मेयर चुनाव फरवरी में चला गया है। ऐसा होता है तो अनूप गुप्ता सबसे लंबी अवधि के मेयर बन जाएंगे। उनका कार्यकाल 17 जनवरी 2023 से शुरू हुआ है। गुप्ता से पहले अब तक सबसे लंबा कार्यकाल 9 जनवरी 2018 से 18 जनवरी 2019 तक देवेश मोदगिल और 8 जनवरी 2022 से 16 जनवरी 2023 तक सरबजीत कौर का रहा है। ये दोनों भाजपा के नेता हैं।
पहले 31 दिसंबर से पहले होता था नए मेयर का चुनाव
शहर को पहला मेयर 23 दिसंबर 1996 को मिला था। भाजपा की कमला शर्मा शहर की पहली मेयर बनीं थीं। शुरुआत में 23 दिसंबर को ही मेयर चुनाव हो जाते थे। इसके बाद भी 2013 तक 31 दिसंबर से पहले मेयर चुनाव संपन्न करा दिए जाते थे और अगला मेयर एक जनवरी को पद की शपथ लेता था लेकिन 2015 के बाद यह सब कुछ बदल गया। बताया जाता है कि जिस भी पार्टी का मेयर हारता था, साल का पहला दिन होने की वजह से पार्टी में काफी निराशा होती थी इसलिए मेयर चुनाव को जनवरी के पहले सप्ताह में कर दिया गया। पूनम शर्मा ने पहली बार 6 जनवरी 2015 को मेयर पद की शपथ ली। इसके बाद से मेयर का चुनाव धीरे-धीरे आगे खिसकता रहा। आशा जायसवाल ने 12 जनवरी तो राजेश कालिया ने 19 जनवरी को मेयर पद की शपथ ली थी।