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एसटीए के वाहनों से जुड़े हादसों का ब्योरा न सौंपा तो अगली सुनवाई पर परिवहन सचिव रहें हाजिर : हाईकोर्ट

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-10 माह बाद भी आदेश का पालन नहीं, हरियाणा व पंजाब सरकार को हाईकोर्ट की फटकार
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-पीड़ितों को जल्द मुआवजे के लिए हाईकोर्ट ने लिया है संज्ञान, लोक अदालत का विकल्प

अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। आदेश के 10 माह बीत जाने के बावजूद हरियाणा व पंजाब सरकार द्वारा स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (एसटीए) से जुड़े सभी वाहन हादसों का ब्योरा सौंपने में विफल रहने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने दोनों सरकारों को फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई पर ब्योरा नहीं सौंपा गया तो दोनों राज्यों के परिवहन सचिव को हाजिर रहना होगा।
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निखिल बनाम शिव राज मामले में मोटर वाहन हादसे के मुआवजे को लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही थी। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि बड़ी संख्या में इस प्रकार के मामले हाईकोर्ट में विचाराधीन हैं जिनमें अनावश्यक रूप से देरी हो रही है। ऐसे में मुआवजा संबंधित याचिका लंबित रहते पीड़ित पक्ष को राहत मिले और बीमा कंपनियों की भी राह आसान हो इसका विकल्प निकालने के लिए हाईकोर्ट ने याचिका का दायरा बढ़ा दिया। साथ ही सभी मोटर वाहन बीमा कंपनियों को याचिका में प्रतिवादी बना लिया। हरियाणा, पंजाब सरकार व चंडीगढ़ प्रशासन को भी याचिका में पक्ष बना लिया था। मामले में सभी बीमा कंपनियां अपना पक्ष रख चुकी हैं। हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई पर बीमा कंपनियों को आदेश दिया है कि उनके पास मौजूद दावों को अलग-अलग किया जाए। 19 बीमा कंपनियों ने हाईकोर्ट में अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। हाईकोर्ट ने इन सभी मामलों को मध्यस्थता के लिए भेज दिया है। इसमें विफल रहने पर मामले फिर संबंधित अदालतों में चले जाएंगे। इसके साथ ही हरियाणा व पंजाब सरकार को आदेश दिया है कि ऐसे सभी दावों का ब्योरा सौंपा जाए जिसमें एसटीए से जुड़े वाहन संलिप्त हैं।
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