जमीन घोटाले मामले में रॉबर्ट वाड्रा समेत अन्य को लेकर हरियाणा सरकार द्वारा पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में दिए गए हलफनाफे पर अब वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने सरकार की कार्यप्रणाली पर निशाना साधा है। खेमका वही अधिकारी हैं, जिन्होंने इस मामले का पर्दाफाश कर डील को रद्द किया था। इस बारे में खेमका ने ट्वीट किया है।
उन्होंने लिखा है कि क्या घोटाले सिर्फ चुनावी मुद्दे तक सीमित रहेंगे? जो घोटाले 2014 में मुख्य चुनावी मुद्दे बने, नौ साल बाद किसे दंड मिला? करोड़ों रुपये खर्च हुए लेकिन कमिशन फेल निकले, अब क्या पुलिस तहकीकात का भी यही हश्र होगा? जिन्हें कटघरे में होना चाहिए था, वही हाकिम बने हैं। यह कैसी न्याय नीति है। इससे पहले भी कई बार खेमका भ्रष्टाचार को लेकर ट्वीट के माध्यम से सरकार को घेर चुके हैं।
गौरतलब है कि हरियाणा सरकार ने हाईकोर्ट में दिए हलफनाफे में कहा है कि तहसीलदार की रिपोर्ट के अनुसार, इसमें कोई राजकोषीय नुकसान नहीं हुआ है। इस मामले को लेकर विपक्षी दलों ने भी सरकार पर निशाना साधा था। हालांकि, मुख्यमंत्री मनोहर लाल के ओएसडी जवाहर यादव ने कहा था कि उपरोक्त मामले की अभी भी जांच चल रही है।
एसआईटी अभी भी अधिक प्रासंगिक दस्तावेज प्राप्त कर रही है और मामले से जुड़े कई व्यक्तियों की जांच कर रही है। एसआईटी की जांच का दायरा सिर्फ राजस्व नुकसान की जांच तक ही सीमित नहीं है बल्कि जांच का उद्देश्य उन सभी लोगों की संलिप्तता का पता लगाना है जो कुछ व्यक्तियों को उच्च वित्तीय लाभ देने के मकसद से आपराधिक साजिश में शामिल हैं।