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मैंने दुनिया देख ली लेकिन पंजाब जैसी जिंदादिली कहीं और नहीं : कबीर बेदी

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चंडीगढ़। मैंने दुनिया देख ली लेकिन पंजाब जैसी जिंदादिली कहीं और नहीं। मैं लाहौर में पैदा हुआ लेकिन जीवन का सफर पंजाब से शुरू हुआ। मेरी आत्मकथा ‘कही अनकही’ पंजाब की धरती से निकले एक युवक के संघर्ष की कहानी है। ये बातें मशहूर अभिनेता व लेखक कबीर बेदी ने कही। शनिवार को वह लेक क्लब में शुरू हुए दो दिवसीय चंडीगढ़ लिटराटी फेस्ट-2023 में बतौर वक्ता बोल रहे थे।चंडीगढ़ लिटरारी सोसायटी की ओर से आयोजित इस फेस्ट में पहले दिन कई सत्रों का आयोजन किया गया। वरिष्ठ पत्रकार रमेश विनायक और राइवर्स पब्लिशिंग के अफ्फान येसवी ने दीप प्रज्ज्वलन कर इस साहित्यिक उत्सव का आगाज किया और बहुप्रतीक्षित लिटरारी डाइजेस्ट भी जारी किया। इस साल के लिटराटी फेस्ट की थीम नवरस है।
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कबीर बेदी के सत्र को चंडीगढ़ लिटरारी सोसाइटी की चेयरपर्सन और फेस्टिवल डायरेक्टर आईएएस अधिकारी डॉ. सुमिता मिश्रा ने होस्ट किया। इस दौरान कबीर बेदी ने अपनी आत्मकथा ‘कही अनकही’ पर खुलकर बात की। कहा कि खुद की जरूरतें पूरी करने के लिए उन्होंने टूरिस्ट गाइड का काम किया। बाद में ऑल इंडिया रेडियो ज्वॉइन किया। बॉलीवुड की टॉप हिट फिल्म खून भरी मांग, कच्चे धागे के अलावा हॉलीवुड की फिल्मों में भी कबीर ने अपने अभिनय का लोहा मनवाया। अभिनेता के साथ वह कोरियोग्राफर और गायक भी हैं।
उन्होंने कहा कि खुद की क्षमता से कभी विश्वास नहीं उठने देना चाहिए, सफलता निश्चित तौर पर आपके कदम चूमेगी। अवसर कभी दस्तक नहीं देता, इसे सही समय पर अनुभव करना पड़ता है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि विश्वास कमाने की चीज है, इसलिए अजनबी लोगों पर आसानी से विश्वास नहीं किया जाना चाहिए। पहले परखें, विश्वास करें और फिर आगे बढ़ें।
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जेब में 1700 रुपये लेकर पहुंचा था मुंबई, किरदार मिले तो खलनायक के
बॉलीवुड के सफर पर कबीर बेदी ने कहा कि जेब में 1700 रुपये लेकर वह मुंबई पहुंचे थे। तब कॅरिअर और भविष्य की ज्यादा समझ नहीं थी। फिल्मों में काम के लिए कोशिश की तो हर जगह खलनायक की भूमिका ऑफर की जाती थी। कई बार मैं निर्देशकों से कहता कि मुझे भाई, दोस्त या नायक की भूमिका दो तो वह हंसकर कहते कि तुम इसी के लायक हो। खलनायक की भूमिका मेरे असल जीवन में भी बॉलीवुड जैसी रही। तीन शादियां हुईं। पहली शादी नृत्यांगना प्रोतिमा से हुई। जीवन की शुरुआत बड़ी खुशी से की, लेकिन वह चार वर्ष से ज्यादा नहीं चल सकी। दूसरी शादी निक्की से हुई जो अमेरिकन मूल की महिला थीं। वहीं अंतिम शादी प्रवीन से की जो ज्यादा जम नहीं पाई। कबीर ने कहा कि शादी बंधन का नहीं बल्कि बेबाकी से जीने का नाम है। बकौल बेदी-मैं शादी के बंधन में बंधकर नहीं रह सका और खलनायक की भूमिका में ही जीता रहा। आज मैं जैसा जीवन जी रहा हूं, उससे कोई दुख नहीं है।

रोजाना हल्दी का सेवन अच्छी सेहत का राज
77 की उम्र में अच्छी सेहत के राज को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में कबीर बेदी ने कहा कि वह आमतौर पर एक सुस्त इंसान हैं, फिटनेस को लेकर ज्यादा एक्सरसाइज नहीं कर पाते, लेकिन नियमित तौर पर रात को हल्दी का सेवन करते हैं। इससे नींद भी अच्छी आती है और किसी तरह के संक्रमण से भी बचाव रहता है। उन्होंने कहा कि सर्दियों में शहद और काली मिर्च रामबाण है। इसका इस्तेमाल करना चाहिए।
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