लगभग एक घंटे तक हुई चर्चा के बाद कोर कमेटी संग प्रदेश प्रभारी ने चर्चा की। सूत्रों की मानें तो हीरा नेगी, सुनीता धवन, राजबाला मलिक के नाम को लेकर काफी पशोपेश बना हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, सुनीता धवन के नाम पर कई पार्षद सहमत दिखे लेकिन वरिष्ठता को देखते हुए हीरा नेगी और राजबाला मलिक के नाम पर भी पार्षदों ने सहमति दी। बैठक के बाद प्रदेश प्रभारी ने बताया कि फिलहाल दावेदारों के नाम पर चर्चा हुई है। अब दिल्ली जाकर राष्ट्रीय अध्यक्ष को पूरी रिपोर्ट सौंपेंगे। उसके बाद वहां से मेयर प्रत्याशी के नाम की घोषणा होगी।
मैं डाकिया हूं, पत्र लेकर दिल्ली जा रहा हूं
मेयर चुनाव को लेकर प्रभात झा से जब बात की गई तो उन्होंने कहा कि मैं तो डाकिया हूं। दिल्ली से मुझे यहां भेजा गया है। यहां से जो नाम तय होगा उसे पत्र में लिखकर दिल्ली ले जाऊंगा। पार्टी हाईकमान जिसे तय करेगा वही मेयर पद का दावेदार होगा। रविवार सुबह बैठक में पूरी रिपोर्ट राष्ट्रीय अध्यक्ष को देनी है।
2018 में मोदगिल के नाम पर हुई थी बगावत
बता दें कि मेयर पद के लिए वर्ष 2018 में देवेश मोदगिल के नाम तय होने के बाद पार्टी में बगावत शुरू हो गई थी। चूंकि चंडीगढ़ से ही मेयर के दावेदार के नाम की घोषणा हुई थी इसलिए और बगावत हुई थी। उस समय भाजपा पार्षद आशा जसवाल ने मेयर पद के लिए आवेदन कर दिया था। हालांकि बाद में आपसी सहमति के बाद नाम वापस ले लिया था।
प्रभात झा ने संगठन मंत्री दिनेश के कुमार के अलावा सांसद किरण खेर, पूर्व सांसद सतपाल जैन और प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन से भी मुलाकात की। उन्होंने सभी से मेयर पद के दावेदारों के बारे में चर्चा की। साथ दावेदारों के स्थानीय कार्यों के बारे में भी पूरी जानकारी ली। यह पूरी रिपोर्ट रविवार को अमित शाह के सामने प्रस्तुत होगी।
पार्टी हाईकमान का निर्देश होगा मंजूर
मेयर पद की दावेदार सुनीता धवन, हीरा नेगी और राजबाला मलिक से जब बात की गई तो उन्होंने कहा कि प्रदेश प्रभारी को जानकारी दे दी है। पार्षदों ने भी अपने मत दे दिए हैं। क्षेत्र में हमने काम भी किए हैं और पार्टी के प्रति निष्ठाभाव से काम भी किया है। फिर भी मेयर पद के लिए पार्टी हाईकमान की ओर से जो निर्देश होगा हमें मान्य है।
राजनीतिक दबाव ने उलझाया मामला
शुरू से ही सुनीता धवन और हीरा नेगी का नाम मेयर पद के दावेदारों में तेज था। उसके बाद अचानक राजबाला मलिक और आशा जसवाल के नाम ने दावेदारों की रेस में रोमांच ला दिया। वहीं महिला सीट आरक्षित होने के कारण चंद्रवती शुक्ला और फर्मिला देवी ने भी दावेदारी ठोक दी थी।
ऐसे में एक बार फिर गुटबाजी की आशंका ने दावेदारों की धड़कनें तेज कर दीं। पार्षद चंडीगढ़ के वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर दिल्ली तक दौड़ लगाने लगे। वहीं कई दावेदारों के समर्थन में अन्य प्रदेशों के नेताओं का भी दबाव भाजपा हाईकमान के पास पहुंचने लगा। ऐसे में मेयर पद के दावेदार का काम उलझ गया। पार्टी हाईकमान ने प्रभात झा को चंडीगढ़ भेजकर पार्षदों की नब्ज टटोलने को कहा ताकि कहीं से गुटबाजी के बाद पासा न पलट जाए।
प्रभात झा के आने के बाद अब कांग्रेस को भी जल्द भाजपा के मेयर दावेदार के नाम की घोषणा का इंतजार है क्योंकि कांग्रेस के केवल पांच ही पार्षद हैं। ऐसे में कांग्रेस भाजपा की गुटबाजी का फायदा उठाने का मौका नहीं छोड़ेगी। उसी के अनुसार कांग्रेस भी अपना उम्मीदवार तय करेगी। अब कांग्रेस नेताओं का ध्यान सिर्फ भाजपा के अलग-अलग गुटों से बात कर क्रॉस वोट करवाने पर रहेगा। वर्ष 2018 में इसका उदाहरण भी भाजपा देख चुकी है। ऐसे में भाजपा के सामने नाम तय होने के बाद आपसी गुटबाजी से पार पाने की भी चुनौती होगी।
सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के लिए भी चर्चा
मेयर पद के लिए महिला सीट आररक्षित होने के बाद अब अन्य पार्षदों की नजर सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के पद पर है। सीनियर डिप्टी मेयर के लिए दलीप शर्मा, जगतार सिंह जग्गा के नाम पर चर्चा हुई तो वहीं डिप्टी मेयर पद के लिए भी कई पार्षदों ने अपना नाम प्रस्तावित किया। साथ प्रदेश अध्यक्ष और सांसद से सिफारिश लगाने को कहा।
उत्तराखंड की रहने वाली हैं। उत्तराखंड के लोग काफी संख्या में चंडीगढ़ में रहते हैं। उत्तराखंड की कई सभाएं और संस्थाएं भी यहां सक्रिय हैं, जो चंडीगढ़ की राजनीति के साथ ही उत्तराखंड की कई विधानसभाओं की सियासत को प्रभावित करती हैं। इसलिए उत्तराखंड से लेकर चंडीगढ़ के कई बड़े नेता चाहते हैं कि हीरा नेगी को बड़ी जिम्मेदारी मिले। वहीं 2015 में बहुमत न होने के बाद भी मेयर का चुनाव मात्र दो वोट से हारीं थीं।- हीरा नेगी
वर्ष 2012 में कांग्रेस से मेयर रह चुकीं हैं। वर्ष 2014 में वह भाजपा में शामिल हुई थीं। इसके बाद उन्हें कोई भी बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी गई है। शहर में मल्टीलेवल पार्किंग, स्मार्ट सिटी से होकर जाने वाले ओवरब्रिज, निगम की बिल्डिंग की मरम्मत की रूपरेखा से लेकर कई प्रोजेक्ट रखीं। हरियाणा के नेताओं से भी अच्छा संपर्क। -राजबाला मलिक
सुनीता धवन पहली बार पार्षद का चुनाव जीतीं हैं। चूंकि महिला हैं और महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। वहीं महिला मोर्चा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और भाजपा पार्षद आशा जसवाल का भी इन्हें समर्थन है। उनके पति भी संगठन में उच्च पदों पर रहे हैं। - सुनीता धवन